बैंक मैनेजरों जवाब: एसबीआई के पास डॉक्यूमेंट हैडऑफिस भेजने का बहाना तो आईसीआई को नहीं मिली पुरानी ई-मेल

नगर निगम में 30 लाख लोन फर्जीवाड़ा मामले की जांच 50 दिन के बाद भी अधूरी है। दरअसल, बीते मई महीने में लोन फर्जीवाड़ा सामने आया था जिसमें 2 लोगों ने निगम के अफसरों-मुलाजिमों से मिलीभगत करके जाली मुलाजिम बनकर 15-15 लाख रुपए का सेंक्शन करा लिया। मामले में 2 बैंकों के मैनेजरों ने ज्वाइंट कमिश्नर कम जांच अफसर को डॉक्यूमेंट उपलब्ध कराने की बजाय अपने अजीबोगरीब जवाब में उलझाए रखा। एसबीआई से डॉक्यूमेंट मांगने पर जवाब दिया कि दिल्ली हैडऑफिस भेज दिया है, जबकि आईसीआई बैंक की ओर से स्टेटमेंट तो उपलब्ध करा दी गई लेकिन जांच अफसर की तरफ से पूछा गया कि निगम के किस अफसर के कहने पर लोन सेंक्शन किया तो बताया गया कि एक साल पहले ई-मेल आया था जो पुराना होने के कारण मिल नहीं रहा है। वहीं एचडीएफसी बैंक की तरफ से स्टेटमेंट व जरूरी डॉक्यूमेंट उपलब्ध करा दिए गए हैं। मामले में हेल्थ अफसर डॉ. किरन कुमार, सुपरिंटेंडेंट नीरज ने बयान दर्ज करा दिया है। हालांकि अब इस हफ्ते फाइनल जांच रिपोर्ट निगम कमिश्नर को भेज दी जाएगी। दरअसल, बीते मई महीने में लोन फर्जीवाड़ा सामने आया था जिसमें 2 लोगों ने निगम के अफसरों-मुलाजिमों से मिलीभगत करके जाली मुलाजिम बनकर 15-15 लाख रुपए का सेंक्शन करा लिया। इन लोगों ने निगम से सारे डॉक्यूमेंट और दस्तखत जाली इस्तेमाल किए। मास्टरमाइंड जालसाजों ने खुद को निगम का मुलाजिम साबित करने के लिए 3 माह की सैलरी स्लिप भी तैयार करवा ली थी। मामला निगम कमिश्नर तक पहुंचा तो क्लर्क हैप्पी को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन जिन लोगों ने निगम का मुलाजिम बनकर जाली तरीके से लोन सेंक्शन करवाया उन तक पहुंच पाना मुश्किल हैं। चूंकि एसबीआई बैंक मैनेजर की तरफ से इंक्वायरी अफसर को को-ऑपरेटर नहीं किया जा रहा। हालांकि सारे डॉक्यूमेंट ऑनलाइन हो चुके हैं, ऐसे में रिकार्ड हैडऑफिस ही दे पाएगा यह समझ से परे हैं। यह बात अलग है कि सीक्रेसी के तहत जरूरी डॉक्यूमेंट उपलब्ध न कराया जाए। इसके लिए बैंक इनकार कर सकता है। बैंक के एक बड़े अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीक्रेसी लॉ के तहत कोई भी डॉक्यूमेंट सरकारी विभागों के मांगने पर देने के लिए बाध्यता नहीं होती। चाहे वह इंक्वायरी का ही पार्ट क्यों न हो। चूंकि डिपार्टमेंटल जांच के दौरान कुछ नहीं निकला तो आगे मुश्किल बढ़ जाती है। हालांकि पुलिस वेरिफिकेशन शुरू होगी तो बैंकों को रिकार्ड देना पड़ेगा। जिसके बाद जाली तरीके से लोन फर्जीवाड़ा का खुलासा हो सकता है। बैंक से जुड़े रिकार्ड पुलिस-विजिलेंस-एनसीबी, एनडीपीसी, साइबर सेल-ईडी जैसे विभागों के इंक्वायरी में मांगने पर उपलब्ध कराने के लिए बाध्यता है। इस तरह की जांच शुरू हुई तो निगम-बैंक अफसर हर कोई जांच के दायरे में आएगा। फिर कोई बहाना किसी भी विभाग के अफसर-मुलाजिम नहीं बना पाएंगे। बैंकों से रिकार्ड मांगने के लिए कम से कम एसएचओ रैंक के अफसर को मुहर-दस्तखत सहित लैटर भेजना होता है। ई-मेल करना होता है। जिसके बाद सारा रिकार्ड ई-मेल के जरिए बैंक भेजते हैं। एचडीएफसी बैंक की तरफ से स्टेटमेंट व जरूरी डॉक्यूमेंट उपलब्ध करा दिए गए हैं। मामले में हेल्थ अफसर डॉ. किरन कुमार, सुपरिंटेंडेंट नीरज ने बयान दर्ज करा दिया है। हालांकि अब इस हफ्ते फाइनल जांच रिपोर्ट निगम कमिश्नर को भेज दी जाएगी, जिसमें अमला क्लर्क हैप्पी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की जा सकती है। जबकि बैंक मैनेजर की तरफ से सहयोग नहीं किए जाने का जिक्र होगा जिसके बाद मामला पुलिस जांच के लिए भेज दिया जाएगा। जांच अफसर अवकाश पर चले गए थे। ज्वाइन करने के बाद जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। गड़बड़ी में जो भी लोग संलिप्त होंगे किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। – गुलप्रीत सिंह औलख, निगम कमिश्नर

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