बैकवाटर में डूबे दत्ता मंदिर किनारे मनाया गया 111वां जन्मोत्सव:समिति बोली-बैकवाटर 138 मीटर तक पहुंचा, श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप मंदिर स्थानांतरित किया जाए

बड़वानी जिला मुख्यालय के पास मां नर्मदा किनारे स्थित एक मुखी श्री दत्ता मंदिर में भगवान का 111वां जन्मोत्सव मनाया गया। सरदार सरोवर बांध परियोजना के कारण मंदिर और कुकर गांव जलमग्न होने के बावजूद, सभी अनुष्ठान बैक वाटर किनारे आयोजित किए गए। गुरुवार को सुबह हवन-पूजन और अभिषेक के साथ भगवान का अनुष्ठान किया गया। शाम 5:30 बजे श्री दत्त जन्मोत्सव और आरती होगी। 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक हुए धार्मिक अनुष्ठान मंदिर समिति के पंडित राधेश्याम शुक्ल और पंडित सचिन विजय शुक्ला ने बताया कि जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। इस दौरान हर दिन शाम 6:30 बजे मंदिर समिति और नर्मदा आरती समिति की ओर से दत्ता भगवान और मां नर्मदा की आरती की गई। कल कन्या पूजन के बाद होगा प्रसादी वितरण जन्मोत्सव के अगले दिन, कल शुक्रवार सुबह 11:00 बजे कन्या पूजन के बाद प्रसादी वितरण किया जाएगा। इन सभी आयोजनों में विभिन्न समितियों का सहयोग रहा। दरअसल, इस मंदिर की एक विशेष पहचान है कि यहां भगवान दत्तात्रेय की एक मुखी मूर्ति स्थापित है, जबकि सामान्यतः उनकी तीन मुखी मूर्तियां देखने को मिलती हैं। इस मंदिर की स्थापना स्वामी वासुदेव सरस्वती ने 1915 में की थी। जलमग्न स्थिति में मजबूती से खड़ा है दत्त मंदिर मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि शहर से पांच किलोमीटर दूर राजघाट-कुकरा गांव का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। 2017 की डूब के बाद प्रशासन ने महात्मा गांधी के स्मारक स्थल को स्थानांतरित कर दिया था, लेकिन प्राचीन दत्त मंदिर अब भी मजबूती से जलमग्न स्थिति में खड़ा है। समिति ने पूर्व कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि क्षेत्र में बांध का बैक वाटर स्तर 138 मीटर है। 2019 से 2025 तक जलस्तर जमा हो चुका है। इसलिए, जहां तक बैक-वाटर पहुंचा है, वहीं तट पर मंदिर का स्थानांतरण किया जाना चाहिए। शासन द्वारा कुकरा बसाहट में दिए गए प्लॉट आस्था के अनुरूप स्वीकार्य नहीं हैं।

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