मुरैना नगर निगम परिषद की आज (शुक्रवार) होने वाली बैठक को महापौर ने निरस्त कर दिया। इससे कांग्रेस के पार्षद और नेताओं ने निगम कमिश्नर कार्यालय पर हंगामा कर दिया। उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन कमिश्नर को सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से महापौर ने बैठक निरस्त की है। जानकारी के अनुसार, आज मुरैना नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक होना थी, पूरी तैयारी कर ली गई लेकिन बैठक नहीं हुई। पार्षदों ने कारण पूछा तो उन्हें पता चला कि महापौर शारदा सोलंकी ने यह कहकर बैठक को निरस्त कर दिया है कि व्यवस्था करने वाले कर्मचारियों की कमी है, इसके कारण बैठक निरस्त की जाती है। इस बात से कांग्रेसी पार्षद और नेता आग बबूला हो गए। नगर निगम कमिश्नर के कार्यालय के बाहर पहुंचे और जमीन पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। नगर निगम कमिश्नर सत्येंद्र धाकरे अपने ऑफिस से बाहर आए और पार्षदों की मांगों का ज्ञापन उनसे लिया। 9 महीने बाद होने वाली थी परिषद की बैठक
नगर निगम परिषद की बैठक 9 महीने बीत जाने के बाद होने वाली थी। कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि बैठक को लेकर हम उत्साहित थे लेकिन महापौर ने बैठक निरस्त कर हमारी मेहनत पर पानी फेर दिया। कांग्रेस नेता और वार्ड क्रमांक 3 के पार्षद विजय दंडौतिया ने कहा कि महापौर और कमिश्नर को अब लिखित में माफीनामा देना होगा, तभी हम बैठक आयोजित होने देंगे। उपसभापति और वार्ड क्रमांक 16 के पार्षद आयुष अग्रवाल ने कहा कि आज अगर बैठक हो जाती तो जनता के मुद्दे बड़ी संख्या में सॉल्व हो सकते थे। ठेला व्यापारियों की समस्या और मुरैना के मेले में दुकानों में हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाया जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हम लोगों ने आक्रोशित होकर यह ज्ञापन सौंपा है। इन मुद्दों पर होनी थी चर्चा


