बैतूल में कांग्रेस जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक निलय डागा ने रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने और उसके स्वरूप में किए गए बदलावों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। डागा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास फंड की कमी है और वह हर महीने कर्ज लेकर काम चला रही है, इसलिए आशंका है कि अब इस योजना को बंद करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने पीपीपी मोड पर बनने वाले मेडिकल कॉलेज को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि निजी निवेश होने पर जनता को मुफ्त इलाज नहीं मिल पाएगा। निलय डागा ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी की विचारधारा से प्रेरित थी, जिसे दुनिया के 80 देशों ने अपनाया था। कांग्रेस ने ग्रामीणों को सालभर काम और 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने के लिए इसे शुरू किया था। पहले इसमें केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत खर्च वहन करती थी। अब इसे बदलकर केंद्र के लिए 60 प्रतिशत और राज्य के लिए 40 प्रतिशत कर दिया गया है। डागा ने दावा किया कि राज्य सरकार 40 प्रतिशत तो दूर, 10 प्रतिशत भी योगदान नहीं दे पा रही है। सरकार हर महीने दो से तीन हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर चल रही है। नाम से दिक्कत नहीं, रोजगार छीनना गलत डागा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को योजना के नाम बदलने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन लोगों से रोजगार छीनना गलत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी के नाम पर राजनीति नहीं करती। कांग्रेस को राम के नाम पर भी कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 1989 में राम मंदिर का दरवाजा राजीव गांधी ने ही खुलवाया था। जब नाथूराम गोडसे ने गांधी जी पर गोली चलाई थी, तब भी उन्होंने ‘हे राम’ कहते हुए प्राण त्यागे थे। कंपनी 450 करोड़ लगाएगी तो जनता से ही वसूलेगी जिले में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर बनने वाले मेडिकल कॉलेज को लेकर भी डागा ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज खुलेगा, लेकिन हकीकत में यह एक निजी मेडिकल कॉलेज है। डागा ने सवाल उठाया कि जब कोई कंपनी 450 करोड़ रुपए का निवेश करेगी, तो मुफ्त इलाज कैसे संभव होगा? उन्होंने आशंका जताई कि यह रकम अंततः जनता से ही वसूली जाएगी।


