बैतूल जिले के नगरीय और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों गन्ने से लदी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर तेजी से दौड़ रही हैं। बैतूल बाजार, चिचोली, साईखेड़ा, आमला क्षेत्र के साथ-साथ इंदौर और नागपुर हाईवे पर भी बड़ी संख्या में ऐसी ट्रॉलियां दिन-रात चल रही हैं। इनमें क्षमता से कहीं अधिक गन्ना भरा जा रहा है, जिससे यातायात और जनसुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, ये गन्ना ट्रॉलियां न केवल ओवरलोड हैं, बल्कि सुरक्षा नियमों की भी खुलेआम अनदेखी कर रही हैं। अधिकांश ट्रॉलियों पर पीछे और किनारों पर रेडियम पट्टी (रिफ्लेक्टर) नहीं लगी होती, जिससे रात के समय ये वाहन पीछे से आने वाले चालकों को स्पष्ट दिखाई नहीं देते। इस कारण कई बार बड़े हादसे होते-होते बचे हैं। 8 टन ढोने तक की ही परमिशन है
जानकारी के मुताबिक, इन ट्रॉलियों में 25 टन या उससे अधिक गन्ना भरकर मिलों तक पहुंचाया जा रहा है। जबकि नियमानुसार, एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से अधिकतम 8 टन भार परिवहन करने की ही अनुमति है। कई स्थानों पर तो दो-दो ट्रॉलियां जोड़कर गन्ना ढोया जा रहा है, जिससे वाहन अस्थिर होकर पलटने का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बैतूल बाजार, ससंद्रा जोड़, चिचोली और सोहागपुर क्षेत्रों में पहले भी गन्ना ट्रॉलियों से संबंधित दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद गन्ना परिवहन में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा, कई ट्रॉलियों का उपयोग व्यवसायिक ढुलाई के लिए भी हो रहा है, जबकि ट्रैक्टर-ट्रॉली को कानूनन केवल कृषि कार्यों के लिए ही छूट प्राप्त है। इस संबंध में आरटीओ अधिकारी अनुराग शुक्ला से संपर्क नहीं हो सका। हालांकि, ट्रैफिक इंचार्ज गजेंद्र केन ने बताया कि उन्होंने गन्ना मिल संचालकों से बातचीत की है और उन्हें ट्रॉलियों को ओवरलोड न चलाने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोड ट्रॉलियां न केवल सड़कों की स्थिति खराब कर रही हैं, बल्कि हादसों की संभावना को भी कई गुना बढ़ा रही हैं। प्रशासन से मांग की गई है कि ऐसी ट्रॉलियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और प्रत्येक ट्रॉली पर रेडियम पट्टी लगाने तथा भार सीमा का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए।


