रतलाम के सिद्ध तीर्थ श्री बरबड हनुमान जी मंदिर पर रविवार को अभिजीत मुहूर्त में मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा और ध्वज-कलश की स्थापना हुई। महामंडलेश्वर 1008 ईश्वरानंदजी महाराज उत्तम स्वामीजी के सानिध्य में जैसे ही भगवान की प्रतिमाएं विराजीं, वैसे ही भक्तों में जय-जयकार के साथ उल्लास छा गया। महाप्रसादी के साथ पांच दिवसीय महोत्सव का समापन हो गया। यज्ञाचार्य पं. दुर्गाशंकर ओझा और 11 भू-देवों ने मंत्रोच्चार के बीच श्री राम दरबार, श्री राधा-कृष्ण, श्री अंबे माताजी, श्री गणेशजी, श्री शिव परिवार की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई। इसके बाद शिखर पर ध्वजा और स्वर्ण कलश की स्थापना की गई। पांच दिवसीय यज्ञ की यजमान संध्या-चंद्रप्रकाश सारडा, ममता-अनिल झालानी, निकिता-संजय अग्रवाल, गायत्री-रमेश मित्तल, लक्ष्मी-महेश अग्रवाल ने आहूति देकर पूर्णाहुति की। उत्तम स्वामीजी ने मंदिर के सुंदर निर्माण और शिल्प के लिए ट्रस्ट की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक साथ भोजन और भजन करने से सर्वत्र खुशहाली रहती है और दुख दूर हो जाते हैं। आज के युग में प्रतिदिन ये संभव नहीं है, इसलिए सप्ताह में किसी दिन अवश्य करना चाहिए। सभी परिवारों से सप्ताह में कम से कम दो बार एक साथ भोजन और भजन करने का आव्हान किया। महोत्सव में उत्तम स्वामी का श्री बरबड हनुमान मंदिर ट्रस्ट ने अभिनंदन किया। कैबिनेट मंत्री काश्यप भी पहुंचे
महोत्सव में एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने पहुंचकर हनुमान जी की पूजा-अर्चना की। ट्रस्ट ने उनका शाल-श्रीफल से सम्मान किया। महोत्सव में अखंड ज्ञान आश्रम के देवस्वरूपानंद जी, महेन्द्र ब्रहमचारी जी, नीलभारतीजी और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीना आशापुरे का भी स्वागत किया। ट्रस्टी कैलाश व्यास ने मंदिर के इतिहास और गतिविधियों पर प्रकाश डाला। 10 करोड़ की राशि से हुआ नवनिर्माण
मंदिर में श्री हनुमानजी की मूर्ति पहले से स्थापित है। ट्रस्ट द्वारा हनुमान जी के मंदिर समेत परिसर में 10 करोड़ से अधिक राशि खर्च कर अन्य मंदिरों का नवनिर्माण कराया है। जिसमें श्री राम दरबार, श्री राधा-कृष्ण, श्री अंबे माताजी, श्री गणेशजी, श्री शिव परिवार की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा की कर शिखर पर ध्वजा और स्वर्ण कलश की स्थापना की गई। यह रहे मौजूद
ट्रस्ट अध्यक्ष कन्हैयालाल सारडा, उपाध्यक्ष चंदूलाल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष शांतिलाल चौधरी, मनोहरलाल पंडया, महापौर प्रहलाद पटेल, रमेश मित्तल, अश्विनी सोनी, राधावल्लभ पुरोहित, लक्ष्मीनारायण मित्तल, चंद्रप्रकाश सारडा, अशोक पंडया, अरूण पुरोहित आदि मौजूद रहे। पांच दिवसीय महोत्सव का महाप्रसादी के साथ समापन हुआ। महाप्रसादी में हजारों भक्तों ने एक संगत-एक पंगत में प्रसादी ग्रहण की।


