मध्य प्रदेश में 12 बच्चों की मौत के बाद आखिरकार सरकार जाग गई। शुक्रवार देर रात तमिलनाडु सरकार ने कोल्ड्रिफ सिरप में ‘जहर’ की पुष्टि हुई। श्रीसन कंपनी की जांच में कफ सिरप में 48.6% डाईथाइलीन ग्लॉयकाल (डीईजी) मिला था। शनिवार रात 12:30 बजे मप्र सरकार की भी 3 जांच रिपोर्ट आ गईं। इसमें भी डीईजी 46.20% पाया गया है। आमतौर पर कफ सिरप में इसे 0.1% से अधिक नहीं मिलाया जा सकता, क्योंकि यह जहरीला होता है। इससे पहले मप्र सरकार ने सिरप और इसे बनाने वाली कंपनी श्रीसन के सभी उत्पादों पर बैन लगा दिया। देर रात कंपनी संचालकों के खिलाफ छिंदवाड़ा में एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि, पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस रिलीज में बताया कि शुरुआत में मौतों को लेप्टोस्पायरोसिस (संक्रमणजनित बुखार) समझा गया। जांच में एक ही मामला पॉजिटिव मिला। फिर भी सैंपल तमिलनाडु भेजने में 10-15 दिन लगाए। पहली मौत 4 सितंबर को हुई। तमिलनाडु से रिपोर्ट 4 अक्टूबर को आई। मंत्रालय ने कहा- अगस्त में जांच होती तो 7 से 8 बच्चे बच जाते। बच्चों को सिरप डॉ. प्रवीण सोनी ने लिखे, उनके भतीजे के मेडिकल स्टोर से 300 सिरप बिके छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से जान गंवाने वाले 11 बच्चे परासिया तहसील के थे। इनका इलाज डॉ. प्रवीण सोनी ने किया था। श्रीसन कंपनी के मप्र में मुख्य स्टॉकिस्ट जबलपुर के राजपाल कटारिया हैं। कटारिया ने एसआर-13 बैच की 554 बोतलें छिंदवाड़ा भेजीं। इनमें से 334 बोतलें न्यू अपना मेडिकल को दी गईं, जिनमें से 300 बोतलें बिक चुकी हैं। यह मेडिकल स्टोर डॉ. प्रवीण सोनी के भतीजे राजेश सोनी का है। तमिलनाडु ने तीसरे दिन दे दी रिपोर्ट… मप्र में 6 दिन लगे
मप्र के फूड एंड ड्रग कंट्रोलर दिनेश कुमार मौर्य ने बताया कि संदिग्ध सिरप की जांच के लिए 1 अक्टूबर को तमिलनाडु को पत्र भेजा गया था। वहां से तीसरे दिन रिपोर्ट आ गई। मप्र में 29 सितंबर को 19 सैंपल भेजे गए। शनिवार तक 7 रिपोर्ट आईं। देश में दवा निगरानी की प्रक्रिया कमजोर मप्र में 450 बोतलें फ्रीज की गई हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव ने अमानक दवा जब्त करने के निर्देश दिए हैं। मृत बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रु. की सहायता घोषित की है। हिमाचल प्रदेश और गोवा से ली गई दो अन्य दवाओं के सैंपल मानक पाए गए हैं। देर रात ड्रग कंट्रोलर ने पुष्टि की- जहरीले सिरप से मौतें हुईं।


