बॉडी बिल्डिंग की जगह हेल्दी हार्ट व इम्युनिटी पर फोकस

कोरोना के बाद फिटनेस को लेकर सोच बदल गई है। अब जिम सिर्फ बॉडी बिल्डिंग के लिए नहीं, बल्कि इम्युनिटी मजबूत करने और हार्ट हेल्थ सुधारने का जरिया बन गया है। 16 साल के किशोर से लेकर 55 साल से अधिक उम्र के लोग भी जिम की ओर बढ़ रहे हैं। कार्डियो एक्सरसाइज को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, जिससे हार्ट हेल्थ बेहतर हो और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। फिटनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक फिटनेस का मतलब अब सिर्फ बॉडी बिल्डिंग नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। चाहे कोई भी उम्र हो हेल्दी हार्ट और मजबूत इम्युनिटी ही असली फिटनेस का पैमाना बन रही है। कोरोना काल के बाद फिटनेस के प्रति नजरिया बदला केस-1 : बॉडी बिल्डिंग नहीं, फिटनेस की चाह : 18 साल का एक स्टूडेंट पहले सोशल मीडिया पर बॉडी बिल्डर्स को देखकर प्रभावित था। वह मसल्स बनाने के लिए वेट लिफ्टिंग पर ध्यान देता था, लेकिन कोरोना के दौरान उसके घर के एक सदस्य को हार्ट की दिक्कत हुई। अब वह कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ बैलेंस्ड न्यूट्रीशन पर ध्यान दे रहा है। केस-2 : वजन घटाना नहीं, इनर स्ट्रेंथ जरूरी : 25 साल की एक प्रोफेशनल पहले जिम सिर्फ वेट लॉस के लिए जाती थी, लेकिन कोविड के बाद उसे महसूस हुआ कि असली फिटनेस बाहरी लुक से ज्यादा अंदरूनी मजबूती पर निर्भर करती है। उसने योग, कार्डियो और हाई इंटेंसिटी वर्कआउट को रूटीन में शामिल किया है। केस 3 : उम्र के साथ बदल गया फिटनेस गोल : 55 साल के एक बिजनेसमैन पहले एक्सरसाइज को सिर्फ युवाओं के लिए मानते थे, लेकिन कोरोना के बाद उनकी सोच बदली। अब वे नियमित रूप से वॉक, साइकिलिंग और हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं। उन्होंने महसूस किया कि ये सिर्फ शरीर को फिट रखने के लिए नहीं, बल्कि हार्ट हेल्थ सुधारने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए भी जरूरी है।

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