बोकारो एसपी के घर पहुंची महिला नक्सली:गार्ड के सामने हाथ ऊपर कर बोली- सरेंडर करने आयी हूं, ऑपरेशन डाकाबेड़ा के दौरान थी मौजूद

बोकारो एसपी मनोज स्वर्गीयारी के आवास पर उस समय खलबली मच गई, जब 22 साल की एक महिला नक्सली पहुंची। वह एसपी से मिलना चाह रही थी। जैसे ही आवास के गेट पर पहुंची तो गार्ड ने रोका। तभी उसने हाथ ऊपर किए और बोला- सरेंडर…उसके सरेंडर कहते ही एसपी आवास में खलबली मच गई। ऐसा करने वाली महिला नक्सली कोई और नहीं बल्कि सुनीता मुर्मू उर्फ लीलमुनी थी। ऑपरेशन डाकाबेड़ा के दौरान थी मौजूद महिला नक्सली की इस एक्शन को देख गेट पर तैनात जवान दौड़े-दौड़े एसपी को सूचना देते हैं। एसपी मनोज स्वर्गीयारी तुंरत महिला को अंदर बुलाते हैं। पूछने पर पता चलता है, तीन साल जेल की सजा काट चुकी सुनीता मुर्मू उर्फ लीलमुनी है। वह ललपनिया के लुगू पहाड़ में 21 अप्रैल को ऑपरेशन डाकाबेड़ा के दौरान हुई मुठभेड़ में शामिल थी। 7 दिनों तक जंगल में भटकी, किसी तरह एसपी आवास पहुंची उसने एसपी को बताया कि 7 दिनों तक जंगल में भटकने और भूखे-प्यासे रहने के बाद सरेंडर करने आई है। अब वह जीना चाहती है। सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत वह सरेंडर करना चाहती है। सुनीता ने बताया कि वह पांच दिनों तक जंगल में ही छिपकर रही और इधर-उधर भटकती रही। इस दौरान वह जंगल में फल खाकर और गंदा पानी पीकर जिंदा रही। इसके बाद वह किसी तरह एक रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, जहां से वह बेरमो पहुंची। लोगों से पूछते-पूछते वह एसपी आवास, बोकारो पहुंची। 2017 में झांसा देकर संगठन में कराया था शामिल सुनीता मुर्मू ने बताया वह मूल रूप से दुमका के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के अमरपानी गांव की रहने वाली है। उसे 2017 में झूठ बोल कर संगठन में शामिल कराया गया था। उसे साथ में कोर्ट चलने की बात कहकर जंगल ले जाया गया, जहां से वह कभी वापस अपने घर लौट ही नहीं सकी। पुलिस के डर से जंगल में भटकती रहती थी। इससे कई बार लगता था कि यह गलत रास्ता है। उसने बताया कि वह संगठन के साथ रहकर खाना बनाने से लेकर सभी काम करती थी। वह हथियार चलाना भी सीख गई थी। उसके खिलाफ 2018 में पहला केस खुखरा थाना में दर्ज हुआ था। इसमें आर्म्स एक्ट व नक्सल गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। गिरिडीह जेल में तीन साल तक बंद रही। सरेंडर पॉलिसी की मिलेगी सारी सुविधाएं एसपी ने बताया कि सुनीता नक्सली गतिविधियां छोड़ मुख्यधारा लौटी है। इसमें सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत मिलने वाली सारी सुविधाएं दी जाएंगी। इसकी सुरक्षा को देखते हुए किसी ओपन जेल में रखा जाएगा। सरेंडर नीति के तहत तीन लाख रुपए नकद, जीविकोपार्जन के लिए जमीन, केस लड़ने के लिए सरकारी वकील, व्यवसाय करने के लिए सहयोग और बीमा सहित अन्य सुविधाएं दी जाएगी। मौके पर अपर समाहर्ता मुमताज अंसारी, बेरमो एसडीपीओ वशिष्ठ नारायण सिंह, सीआरपीएफ 26 बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी प्रकाश चंद्र बादल, उप कमांडेंट विनोद कुमार यादव आदि मौजूद थे।

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