पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड स्थित तरतरा गांव निवासी के रहने वाले अह्लाद नंदन की ईरान में मौत हो गई थी। वह वहां बीएनडी याट शिप मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। 27 मार्च 2025 को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। एक महीने के लंबे प्रयास और संघर्ष के बाद परिजनों को आह्लाद का शव सौंपा गया। लेकिन परिजनों के होश तब उड़ गए जब ताबूत में रखा शव किसी और का निकला। परिजनों को सौंपे गए कागजात तो सही थे पर बॉडी किसी और की थी। परिजनों ने बताया- कोलकाता एयरपोर्ट में नहीं दिखाई बॉडी इस संबंध में आह्लाद के भाई रघु नंदन ने कहा कि हमलोग बॉडी लेने कोलकाता एयरपोर्ट गए थे। वहां शव रिसीव किया। शव लेने के दौरान हमने बॉडी दिखाने को कहा पर उसकी अनुमति नहीं दी गई।
वहां से बॉडी लेकर जब शव गांव लाया गया और ताबूत खोला गया, तो उन्हें झटका लगा। शव उनके भाई की नहीं थी। बॉडी में ऐसी कोई निशान नहीं था जिससे पहचान की जा सके। परिजनों के मुताबिक आह्लाद के दाहिने पैर पर ऑपरेशन का निशान था। दूसरे युवक शिवेंद्र का निकला शव जांच और बातचीत के बाद स्पष्ट हुआ कि यह शव जौनपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी शिवेंद्र प्रताप सिंह का है, जिसकी मौत आह्लाद के साथ उसी दुर्घटना में हुई थी। आह्लाद का शव जहां कोलकाता पहुंचना था, वहीं शिवेंद्र का शव दिल्ली आना था। लेकिन शवों की अदला-बदली हो गई। शिवेंद्र के पिता संदीप प्रताप सिंह को शव की फोटो भेजी गई, जिस पर उन्होंने अपने बेटे की पहचान की पुष्टि की।
परिजनों ने उठाया भारतीय दूतावास पर सवाल आह्लाद के परिजनों ने भारतीय दूतावास पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक महीने तक शव लाने की प्रक्रिया चली, लेकिन अंत में जो शव भेजा गया वह किसी और का निकला। इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है, यह सवाल स्थानीय प्रशासन और विदेश मंत्रालय के समक्ष खड़ा हो गया है। प्रशासन हरकत में, शव को भेजा गया शीतगृह घटना की जानकारी मिलते ही मनोहरपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी जयदीप लकड़ा, अंचलाधिकारी प्रदीप कुमार और थाना प्रभारी अमित कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति की जानकारी ली और जिला प्रशासन के निर्देश पर शव को चक्रधरपुर स्थित शीत गृह में रखवा दिया गया है।
शव की पहचान के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा मनोहरपुर अंचलाधिकारी प्रदीप कुमार ने कहा कि जब शिवेंद्र के परिजन मौके पर पहुंचेंगे और शव की पहचान करेंगे, तब शव उन्हें सौंप दिया जाएगा। दूसरी ओर, आह्लाद के परिजन अब अपने बेटे का असली शव लाने के लिए फिर से दूतावास और प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं। नौकरी के लिए ईरान गया था आह्लाद आह्लाद नंदन, सेवानिवृत्त शिक्षक रामानंदन महतो के द्वितीय पुत्र थे। वे 17 अगस्त 2024 को ईरान की बीएनडी याट शिप मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में इंजीनियर की नौकरी के लिए गए थे। अब दुर्घटना और उसके बाद की लापरवाही ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।


