भास्कर एक्सपर्ट बोकारो जिला में बच्चे मोबाइल एडिक्ट के शिकार हो रहे हैं। मोबाइल एडिक्ट के शिकार बच्चे अपने बालपन से दूर होते जा रहे हैं। जिला के कई अस्पतालों के सर्वे से पता चला है कि सलाना 60 हजार बच्चों का इलाज चल रहा है, जो डिप्रेशन के शिकार हुए हैं। जबकि सदर अस्पताल बोकारो के ओपीडी में प्रति महीने करीब 10 से 15 हजार बच्चे आते हैं। वहीं स्कूलों में भी मोबाइल एडिक्शन से बच्चों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से स्क्रीनिंग की जा रही है। स्कूलों से मोबाइल पर मिलने वाले टास्क से भी बच्चों में इसका असर पड़ा है। कई बच्चों की बीमारी अंतिम स्टेज में पहुंच गया है, इसकी वजह से उनका इलाज भी लंबा चल रहा है। इसकी पुष्टि सदर अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत कुमार ने की है। उन्होंने बताया कि 05 से 12 वर्ष के बच्चों में यह लत बिल्कुल नशे की तरह लग गई है। मोबाइल एडिक्शन से ज्यादा मेंटली डिस्टर्ब हो रहे बच्चे: मोबाइल एडिक्शन के ज्यादा उपयोग से बच्चे मेंटली डिस्टर्ब हो रहे हैं। चूंकि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंख और ब्रेन को प्रभावित कर रही है। इसकी वजह से कभी-कभी मरीज काफी ज्यादा मेंटली डिस्टर्ब हो जाता है। बच्चों में भी मेंटली लक्षण बढ़ रहे हैं। लेकिन उनपर ध्यान नहीं दिया जाता है, इसकी वजह से वह अवसाद से ग्रसित हो जाता है और अंतिम समय में परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक बीमारी अंतिम स्टेज में पहुंच जाती है। पागलपन जैसी हरकत दिख रही बच्चों में बच्चों के ज्यादा मोबाइल एडिक्ट होने के कारण वह कई तरह की बीमारियों से भी घिरते जा रहे हैं। मोबाइल एडिक्शन से बच्चों में अवसाद, चिड़चिड़ापन, अनिंद्रा, ध्यान भटकाव, तनाव, भूलने की बीमारी, पागलपन जैसी बीमारी देखने को मिल रही है। कोरोना काल के बाद स्क्रीन पर आधारित काम व पढ़ाई लिखाई ज्यादा होने के कारण स्क्रीन पर आधारित उपकरणों ने बच्चों में आंख और दिमाग से संबंधित बीमारियों की परेशानियां काफी अधिक बढ़ा दी है। बोकारो में खासकर डिजिटल निर्भरता काफी अधिक है। स्कूल के सभी मैसेज भी मोबाइल पर ही मिलते हैं। अब तो स्थिति यह हो गई है कि माता-पिता के बगल में ही बैठकर बच्चे मोबाइल चलाते हैं। जब उन्हें मना करते हैं तो बच्चे झुंझला जाते हैं। पहले यह ट्रेंड सिर्फ शहर में ही था, अब गांवों में भी देखने को मिल रहा है। ऐसे में मोबाइल बच्चों के दिमाग को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सुबह उठते ही सबसे पहले मोबाइल लेना और रात को आंख बंद होने तक स्क्रोल करते रहना प्रचलन बन गया है। डॉ. केएम ठाकुर, मानसिक रोग विशेषज्ञ सवाल – बच्चे मोबाइल एडिक्ट कैसे हो रहे हैं? जवाब – मोबाइल की स्क्रीन पर ज्यादा देर तक नजरें टिकाने और ज्यादा देर बात करने से बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। इससे भूलने की बीमारी होती है और सोचने की क्षमता कम हो जाती है। सवाल – मोबाइल एडिक्ट बच्चों में कौन-कौन सी बीमारियां हो रही है? जवाब – मोबाइल एडिक्ट बच्चे देर रात तक सोते हैं, जिस कारण नींद पूरी नहीं होती है और वह अनिंद्रा, चिड़-चिड़ापन हो रहा है। इससे उनमें तनाव बढ़ाव बढ़ रहा है। सवाल – मोबाइल एडिक्ट से किस प्रकार बचाव करें? जवाब- मोबाइल एडिक्ट बच्चों को उनकी स्थिति के अनुसार ही दवाएं देते हैं। ताकि वह अपनी दिनचर्या बनाकर पहले जैसी स्थिति में आ सके। भास्कर एक्सक्लूिसव बच्चे की जांच करते चिकित्सक।


