धौलपुर जिला कारागृह का बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने निरीक्षण किया। यह निरीक्षण सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालन में किया गया। इस दौरान जिला एवं सेशन न्यायाधीश अरुण कुमार अग्रवाल, जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी.टी., जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान और सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेखा यादव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान, बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने प्रत्येक बैरक और रसोई घर का दौरा किया। उन्होंने बंदियों से जातिगत भेदभाव के संबंध में पूछताछ की, जिस पर किसी भी बंदी ने भेदभाव की बात नहीं कही। टीम ने रसोईघर में भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की। खाना बनाने वाले बंदियों ने बताया कि विभिन्न जाति और समुदाय के बंदी मिलकर खाना बनाते हैं। शौचालयों की साफ-सफाई के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए गए। बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने उन सभी बंदियों को अपनी जमानत करवाने के निर्देश दिए, जिनकी जमानत हो चुकी है। कुछ बंदियों ने बताया कि उनकी जमानत के लिए घर वालों से बातचीत नहीं हो पाती है। इस पर जेल अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जेल नियमों के अनुसार बंदी के प्रवेश के समय केवल 5 मिनट की बात करने की अनुमति होती है, उसके बाद घर वालों को रिचार्ज कराने पर ही बातचीत करवाई जाती है। टीम ने सभी बंदियों के स्वास्थ्य, नाश्ते और खाने के बारे में जानकारी ली। आज के खाने के बारे में भी पूछा गया। बंदियों से फॉर्मेट के संबंध में जानकारी लेने पर पाया गया कि कुछ बंदियों के पास फॉर्मेट उपलब्ध नहीं थे। इस संबंध में जेल अधीक्षक को निर्देश दिए गए कि सभी बंदियों को फॉर्मेट भरकर दिए जाएं। इसके बाद महिला बैरकों का भी निरीक्षण किया गया। महिलाओं से उनकी पेशी, तारीख और फॉर्मेट के बारे में जानकारी ली गई। उनके बच्चों के लिए दूध, दलिया, नाश्ता, खाना और मेडिकल सुविधाओं की भी जानकारी प्राप्त की गई। रसोईघर में खाने की गुणवत्ता का अवलोकन करने पर सब्जियों में मिर्च अधिक पाई गई, जिस पर जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि मिर्च कम रखी जाए, क्योंकि तेज मिर्च बंदियों के स्वास्थ्य पर असर डालती है।


