राजस्व मण्डल ने भीलवाड़ा जिले की करेड़ा में नियुक्त नायब तहसीलदार और ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत की पुत्री कंचन चौहान को एपीओ कर दिया है। चौहान के एपीओ आदेश में प्रशासनिक कारण बताया गया है। मण्डल ने यह आदेश राज्य सरकार के निर्देश पर जारी किए हैं। बता दें कि चौहान वर्ष 2018 बैच की चयनित अभ्यर्थी हैं। उनकी नियुक्ति को लेकर फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर नियुक्ति पाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और एसओजी को शिकायत की थी। राज्य सरकार द्वारा उक्त शिकायत पर एसओजी द्वारा जांच करवाई गई। हालांकि उनकी जांच रिपोर्ट फिलहाल राजस्व मण्डल प्रशासन को नहीं भेजी गई है। बता दें कि शिकायत के बाद मण्डल ने गत पांच वर्ष के दौरान दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर नियुक्ति पाने वाले सभी अभ्यर्थियों की फिर से जांच भी करवाई थी। इसमें कुछ अभ्यर्थी की जांच रिपोर्ट में नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को फर्जी पाए गए थे। 12 अगस्त को हुई थी तहसीलदार के खिलाफ शिकायत कंचन चौहान आरएएस-2018 में चयनित अभ्यर्थी हैं। पहली पोस्टिंग 27 दिसंबर 2021 को गुलाबपुरा (भीलवाड़ा) में नायब तहसीलदार के तौर पर हुई थी। करीब एक साल से वे करेड़ा में पोस्टेड हैं। ब्यावर निवासी फणीश कुमार सोनी ने 12 अगस्त को कंचन चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। कंचन चौहान के नवोदय स्कूल और उदयपुर यूनिवर्सिटी से मिले एजुकेशनल डॉक्यूमेंट की जांच की मांग की गई है। शिकायकर्ता सोनी की मांग है कि- कंचन चौहान का फिर मेडिकल परीक्षण कराया जाए। इसके लिए किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में मेडिकल बोर्ड का गठन हो। इस गंभीर प्रकरण की जल्द से जल्द निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच हो। क्योंकि जिन डॉक्टर ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाया था वो स्वैच्छिक सेवानिवृति ले चुके हैं। तीसरी बार में मिली थी सफलता कंचन ने साल 2018 में सिलेक्शन के बाद बताया था कि उन्होंने 2013 और 2016 में भी आरएएस का एग्जाम दिया था। पहले वो प्री क्लियर नहीं कर पाई थी। दूसरे प्रयास में प्री क्लियर किया, लेकिन मेंस क्लियर नहीं हुआ। वर्ष 2018 की परीक्षा में इंटरव्यू के बाद 600 के करीब रैंक हासिल की थी। ………. पढें ये खबरें भी….


