मन्दसौर पुलिस ने फ्रेंचाइजी देने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का शुक्रवार को खुलासा किया है। मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से 23 लाख 31 हजार 400 रुपए नकद, 11 मोबाइल फोन, 38 मोबाइल सिम, 30 एटीएम कार्ड और 14 बैंक पासबुक बरामद किए गए है। आरोपी बिहार के पटना से डोमेन लेते थे और नामी कंपनियों की फर्जी वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन ठगी करते थे। पुलिस आरोपियों को पकड़ने बिहार जिले के नवादा स्थित नक्सली इलाके में गई थी। वहां आरोपियों की मां ने क्षेत्रीय भाषा में गाना गा कर लोगों को इकट्ठा कर लिया। इसके बाद पुलिस आरोपियों को स्थानीय थाने ले गई। वहीं मुख्य आरोपी को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। यह था मामला एसपी अभिषेक आनन्द ने बताया कि 22 दिसम्बर को मन्दसौर निवासी सूरज पिता योगेश गुप्ता ने शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने बताया कि 27 नवम्बर को उसे एक मेल आया, जिसमे उसे जूडियो ब्रांड की फ्रेंचाइजी देने का प्रपोजल दिया था। उन्हें कॉल कर फ्रेंचाइजी की जानकारी दी गई। इसके बाद फरियादी ने 2 से 17 दिसम्बर तक ओवरसीज बैंक और फेडरल बैंक के अलग अलग खातों में 38 लाख 67 हजार 710 रुपए आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए। आरोपी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में एक अमाउंट और डालने का बोला। फरियादी ने बैंक में इस अकाउंट के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वह एक बचत खाता है, जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम से है। इसके बाद फरियादी को धोखाधड़ी का पता चला। लेकिन तब तक उसे साढ़े 38 लाख से अधिक रुपयों की चपत लग चुकी थी । बिहार में डोमेन कोलकाता में ठगी शिकायत के बाद पुलिस को साइबर सेल से पता चला कि साइबर ठगी करने वाली गैंग अलग-अलग राज्यों में वेबसाइट बनाकर लोगों को बड़ी के कंपनियों की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर फंसाते थे। वह बड़ी रकम अलग-अलग बैंक अकाउंट में डलवाते थे। इसमें अलग-अलग गैंग को काम बाटा था। एक गैंग फर्जी तरह से बैंक अकाउंट खुलवाती, दूसरी गैंग फर्जी सिम कार्ड कलेक्ट करती और एक अन्य गैंग एटीएम से रुपए विड्राल करती थी। यह अकाउंट, सिम और एटीएम उन लोगों के नाम होते थे, जिन्हें अपने नाम पर बैंक अकाउंट, सिम और एटीएम कार्ड होने का पता नहीं होता था। इन बैंक खातों में मोटी रकम ट्रांसफर होती थी। आरोपियों के कब्जे से 38 सिम कार्ड, 11 मोबाइल, 14 बैंक अकाउंट की पासबुक और 30 एटीएम मिले है। पुलिस फर्जी बैंक अकाउंट और सिम कार्ड उपलब्ध करवाने वाले लोगों को भी आरोपी बनाएगी। ऐसे करते थे ठगी आरोपी फर्जी सिमकार्ड से कॉल या मेल कर बड़ी कंपनी की फ्रेंचाइजी देने का झांसा देते थे। जब कोई व्यापारी झांसे में आता, तो उसे अलग-अलग नम्बर से कॉल कर फंसाते और फ्रेंचाइजी देने की डील करते थे। जैसे ही व्यापारी रुपया बैंक अकाउंट में डालता, उसे विड्राल कर लेते। जितेंद्र ऐसे बना ठग पुलिस के अनुसार गैंग का मुख्य आरोपी जितेन्द्र सिंह पिता राजकपुर प्रसाद कुर्मी (31) ग्राम मायड हिसार, हरियाणा का रहने वाला है। जितेंद्र वर्तमान में 7/63 रोड शॉपिंग माल के पास मुकुंदपुर जिला कोलकाता, प. बंगाल स्थित एक फ्लैट में रह रहा था। उसकी शादी बिहार के नवादा में हुई थी। उस गांव में कई लोग इस तरह का गैंग ऑपरेट कर ऑनलाइन ठगी का काम करते है। जितेंद्र ने भी यही से ठगी करना सीखा और नवादा बिहार जिले के झोर गांव के रहने वाले सचिन रंजन उर्फ अमित उर्फ टिंकु पिता मिथलेश कुमार (33), अमिष पिता मिथलेश कुमार (23) और नितीश कुमार पिता शिवनंदन प्रसाद (23) के साथ मिलकर ठगी करने लगा । न्यू ईयर की पार्टी से लौटा एयरपोर्ट पर पकड़ाया एसपी ने बताया कि मुख्य आरोपी जितेंद्र को पकड़ने पुलिस की 2 टीम बिहार और पश्चिम बंगाल में 13 दिनों तक तलाश करती रही। आरोपी मनाली में न्यू ईयर की पार्टी मनाने गया था। वापस लौट तो पुलिस ने उसे कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर किया। इसके अलावा तीन अन्य आरोपियों को बिहार के नवादा क्षेत्र से पकड़ा गया । नक्सली इलाके में पहुंची पुलिस, क्षेत्रिय लोगों ने घेरा पुलिस के अनुसार बिहार का नवादा जिला नक्सली इलाके के पास ही है। इससे लगे झोर गांव में पुलिस आरोपियों को पकड़ने गई थी। यहां आरोपियों की मां ने क्षेत्रीय भाषा में गाना गा कर लोगों को इकट्ठा कर लिया। जब पुलिस को लगा कि उन्हें घेर लिया है, तो तुरंत आरोपियों को नजदीकी थाने ले जाया गय। इसके बाद नवादा एसपी के सहयोग से मध्यप्रदेश पुलिस को सफलता मिली।


