प्रियंक भट्ट | बांसवाड़ा जिले के परतापुर कस्बे में भारी डिस्काउंट का लालच देकर लोगों से लाखों रुपए ठग लिए गए। यहां एक महीने पहले ही खुले शोरुम पर लोगांे को ब्रांडेड घरेलू सामानों पर 45% डिस्काउंट देने का दावा किया गया। शुरुआत में लोगों से एडवांस लेकर 3 दिन के भीतर डिलेवरी भी दी गई। डिस्काउंट की होड में खरीददारी की ऐसी होड मची की गांवों से भी लोग खरीदी के लिए आने लगे। किसी ने बेटी और भतीजी की शादी के लिए 1.50 लाख तक का एडवांस देकर बर्तन और घरेलू सामान बुक कराया तो किसी ने सोफासेट और अलमारी तो किसी ने और कोई सामान। लेकिन बवाल तब मचा जब 20 जनवरी को ग्राहक तय दिन सामान लेने के लिए शोरुम पहुंचे। जहां ताला लगा देख सभी के होश उड़ गए। बिल पर दिए नंबरों पर कॉल किया तो संपर्क नहीं हो पाया। खुद के साथ ठगी की आशंका पर लोग गढ़ी थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को दी रिपोर्ट में 50 से भी ज्यादा ग्राहकों ने बिल नंबर और पेमेंट की डिटेल जानकारी दी है। धोखाधड़ी की शंका इसलिए भी है क्योंकि, फर्म ने अपना शोरुम शीतल कॉम्प्लेक्स में 1 दिसंबर को ही खोला था। लेकिन दो दिन से शोरूम बंद है और भीतर सामान भी है या नहीं इसे लेकर भी संशय बना हुआ है। पीड़ितों का दावा है कि करीब 200 लोग है जो इस ठगी का शिकार हुए हैं। केस 1: रजत भाटिया ने बताया कि उनकी ई-मित्र की दुकान है। 45 प्रतिशत डिस्काउंट मिलने की जानकारी पर उन्होंने 5 हजार की अलमारी बुक कराई। इस पर एडवांस में 3 हजार रुपए लिए लेकिन अलमारी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि जब लोगों को धोखाधड़ी की आशंका हुई तो उनकी दुकान पर करीब 100 से ज्यादा लोग आए थे। इसके बाद थाने में रिपोर्ट दी। ग्राहकों को दिए बिल पर लिखे जीएसटी नंबर की पडताल की तो पता चला कि फर्म सैयद मुस्तफा के नाम से रजिस्टर्ड है। इसका रजिस्ट्रेशन पिछले साल 21 नवंबर को ही हुआ है। फर्म का प्रशासनित ऑफिस उदयपुर में दर्शा रखा है। वहीं परतापुर में जिन दुकानों को किराए पर लिया उनका किरायानामा भी बनवाया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब फर्म रजिस्टर्ड है तो फिर शोरुम बिना ग्राहकों को किसी सूचना के एकाएक बंद क्यों कर दिया गया? संचालकों ने अपने मोबाइल बंद क्यों कर दिए? यहीं कारण है कि ग्राहकों को धोखाधड़ी की आशंका है। हकीकत जानने के लिए भास्कर ने फर्म के दोनों मोबाइल नंबरों पर कॉल लगाए लेकिन मामला सामने आने के दो दिन बाद भी मोबाइल नंबर एक्टिव नहीं हो पाए। केस 2: नातावाड़ा के सुखलाल डिंडोर बताते है कि गांव के कुछ सरकारी कर्मचारी सामान लाए। उन्हें तीन दिन में डिलेवरी मिल गई। मेरी भतीजी की शादी थी तो मैं भी सेफ और पलंग लेने गया। जहां मुझे 35 हजार कीमत बताकर डिस्काउंट में 20 हजार में देना बताया। लेकिन 20 हजार एडवांस ले लिए लेकिन 20 जनवरी को डिलेवरी देनी थी लेकिन अब वहां ताला लगा है। मेरे 16 रिश्तेदार भी एडवांस राशि जमा करवा चुके है। फर्म संचालकों ने पहले गांवो में ऑटो भेजकर लोगों को अपनी लुभावनी स्कीम पहुंचाई। इसके बाद शुरुआत में छोटे घरेलू सामान पर लोगों को 3 दिन के भीतर डिलवरी भी दी ताकि लोगों का भरोसा और बढ़े। स्कीम के तहत 39 तरह के घरेलू आइटम पर 20 से 45 प्रतिशत तक डिस्काउंट देने का दावा किया जा रहा था। इनमंे एसी, सोफासेट, अलमारी, पलंग, कूलर, फ्रीज, डाइनिंग टेबल जैसे महंगे सामान भी शामिल थे । खास बात यह है कि डिस्काउंट के फेर में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। केस 3: रमेश पारगी ने बताया कि उनकी माही की बेटी की होली पर शादी है। घरवालों ने दहेज के सामान के लिए अच्छा डिस्काउंट मिलने पर 2 लाख रुपए एडवांस में देकर ऑर्डर बुक कराया। 24 जनवरी को डिलेवरी मिलनी थी लेकिन इससे पहले धोखाधड़ी होने की जानकारी मिली। पूरा परिवार परेशान है। गढ़ी थानाधिकारी तेजसिंह सांदू ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सामान के नाम पर एडवांस रकम लेकर फरार होने की कुछ लोगों की रिपोर्ट आई है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार व्यापारी तमिलनाडु क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।


