हरीश सैनी जिला मुख्यालय से महज छह किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत देपालसर का रेलवे स्टेशन चूरू के रेलवे स्टेशन से भी पुराना है। ब्रिटिश हुकूमत के समय जिले का पहला स्टेशन बीकानेर रियासत में महाराजा गंगासिंह ने गांव देपालसर में बनवाया था। इतिहासकारों की माने, तो उस जमाने में गांव से बीकानेर तक की 170 किमी दूरी के लिए ब्रिटेन से आई रेल पटरियां बिछाने में करीब दो हजार मजदूरों को सात साल लगे थे और इस काम पर 20 लाख रुपए खर्च हुए थे। देपालसर स्टेशन शेखावाटी अंचल में व्यापार का प्रमुख केंद्र था। यहां पर आज के पाकिस्तान, म्यांमार व बांग्लादेश से सामान आता था, जिनको स्टेशन के पास बनाए गए बड़े गोदाम में रखा जाता था और यहां से आसपास के क्षेत्रों में पहुंचाया जाता था। यहां स्थित 300 साल पुराना तारागढ़ी गणेश मंदिर भी प्रदेशभर में लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर में सबसे ऊपर प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जबकि ठीक नीचे गर्भगृह में गजानन विराजमान हैं। मंदिर मिट्टी के ऊंचे टीले पर स्थित है। मान्यता है कि 70 फीट ऊंचे मिट्टी के टीले की खुदाई करने पर यह प्रतिमा निकली थीं। जोधपुर की राजकुमारी तारामणी के नाम पर मंदिर का नाम तारागढ़ी प्रचलित हुआ, क्योंकि उन्हें ही सपने में इस स्थान पर गणपति महाराज दिखे थे। बताया जाता है कि मंदिर निर्माण के बाद तीन बार मूर्ति का मुख पूर्व की ओर किया गया, लेकिन मूर्ति का मुख अपने आप दक्षिण की तरफ हो जाता था। तब से अब तक दक्षिणमुखी ही है। प्रशासक बलवीर ढाका ने बताया कि देपालसर को 1982 में ग्राम पंचायत का दर्जा मिला। इसमें देपालसर के अलावा श्यामपुरा व मेघसर गांव शामिल है। पंचायत क्षेत्र में पहले गंदे पानी की निकासी की समस्या थी, जिसके समाधान के लिए 14 लाख रुपए की लागत से गेनाणी व ड्रेनेज सिस्टम का काम करवाया गया। 70 से 80 लाख की लागत से जगह-जगह खरंजा का निर्माण करवाया गया है। बरसाती पानी संरक्षण के लिए 100+ कुंड व अमृत सरोवर अभियान में देपालसर में 38 लाख की लागत से जोहड़ बनवाया गया है। तारागढ़ी गणेश मंदिर जाने के लिए ओवरब्रिज बना हुआ है, लेकिन वहां से आवागमन का सुगम रास्ता नहीं है। ओवरब्रिज के नीचे जल भराव होता है।


