भास्कर न्यूज | लुधियाना निटवियर क्लब ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर वस्त्र क्षेत्र पर जीएसटी दरों में सुधार की मांग की है। क्लब चेयरमैन विनोद थापर ने कहा कि 2500 रुपए तक के कपड़ों पर 5% और इससे ऊपर के कपड़ों पर 18% जीएसटी लगाने का फैसला आम जनता, कारीगरों और उद्योग के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि ऊनी कपड़े उत्तर भारत, पूर्व और पूर्वोत्तर में जरूरत हैं। इनकी कीमतें ज्यादातर 2500 से ऊपर होती हैं। ऐसे में 18% जीएसटी का सीधा बोझ आम आदमी पर पड़ेगा। लुधियाना का उद्योग पहले ही चीन और बांग्लादेश से सस्ते आयात से संघर्ष कर रहा है। ऐसे में टैक्स बढ़ोतरी से संकट और गहरा होगा। हाथ से बने पारंपरिक कपड़ों पर भी अब 18% टैक्स लगेगा। वहीं मशीन से बने प्रदूषणकारी वस्त्र 5% जीएसटी में बिकेंगे। यह परंपरागत कला और कारीगरी के लिए खतरा है। कुर्ता-पायजामा, साड़ी और शेरवानी जैसे पारंपरिक परिधान भी 18% टैक्स के दायरे में आएंगे। इससे आम परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। व्यापारी दोबारा कैश ट्रांजक्शन और अनौपचारिक बाजार की ओर लौट सकते हैं। इससे जीएसटी सुधारों को बड़ा झटका लगेगा।


