ब्लैक स्पॉट का सिर्फ रोड सेफ्टी ऑडिट हुआ:16 ब्लैक स्पॉट, 3 साल में 27 मौतें… इन्हें सुधारने 4 करोड़ मिले थे, निगम ने खर्च ही नहीं किए

शहर में 16 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं, जहां बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं। इन्हें खत्म करने के लिए सरकार ने मार्च और मई 2023 में नगर निगम भोपाल को 3.98 करोड़ रुपए दिए थे। निगम ने सिर्फ 5.30 लाख रुपए खर्च किए। उससे भी केवल बागसेवनिया थाना और आशिमा मॉल क्षेत्र का रोड सेफ्टी ऑडिट कराया गया। एसपीए द्वारा तैयार यह डीपीआर भी निगम की फाइलों में धूल खा रही है। सुधार का कोई काम नहीं हुआ। 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2024 तक इन ब्लैक स्पॉट पर 99 हादसे हुए और 27 लोगों की मौत हो गई। साल 2025 में ट्रैफिक पुलिस ने ब्लैक स्पॉट के अनुसार हादसों और मौत के आंकड़े आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए, ताकि हकीकत सामने नहीं आ सके। पिछले साल भोपाल में लगभग 3000 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। इन हादसों में कम से कम 215 मौतें हो गईं। बंद सिग्नल, असुरक्षित लेफ्ट टर्न, अतिक्रमण जैसे छोटे-छोटे कारण बड़े हादसों की वजह जानिए… कहां क्या समस्या (गोविंदपुरा टर्निंग, डीबी मॉल चौराहा, 1250 चौराहा, बेस्ट प्राइस तिराहा आदि जगह भी समस्या है।) कब कितनी राशि मिली
मार्च 2023 : 1.73 करोड़
मई 2023 : 2.25 करोड़ (राशि मिलने के बाद भी न तो चौराहे रिडिजाइन हुए, न लेफ्ट टर्न सुधारे गए न स्पीड कंट्रोल के इंतजाम किए गए।)
अगस्त में सुप्रीम कोर्ट की टीम आई, फिर भी स्थिति नहीं बदली
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति आई थी। 8 ब्लैक स्पॉट देखे थे। अफसरों से पूछा गया था, सुधार कब होगा। फिर भी राशि उपयोग नहीं हुई। एक्सपर्ट कमेंट – डॉ. सिद्धार्थ रोकड़े, ट्रैफिक एक्सपर्ट (मैनिट) बजट नहीं… इच्छाशक्ति की कमी से बने रहते हैं ब्लैक स्पॉट ब्लैक स्पॉट पर हादसे सिर्फ तेज रफ्तार से नहीं होते, सड़क की खराब बनावट भी इसका बड़ा कारण होती है। ऐसे स्थानों पर लेन का सही बंटवारा, रिफ्लेक्टर, स्पीड कंट्रोल और जेब्रा क्रॉसिंग जैसे बुनियादी सुधार जरूरी हैं। पैदल लोगों की सुरक्षित आवाजाही, लेफ्ट टर्न क्लियर और सिग्नल दुरुस्त करना भी उतना ही अहम है। कई जगह अतिक्रमण होने के कारण सड़क दिखाई ही नहीं देती, जिससे सड़क हादसे बढ़ते हैं। जब तक अतिक्रमण नहीं हटेंगे, तब तक सुधार का असर नहीं दिखेगा। इन कामों के लिए इच्छाशक्ति होना भी जरूरी है। ब्लैक स्पॉट में सुधार के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय करके प्लान बनाया है। हर एजेंसी के अपने-अपने हिस्से के काम हैं। निगम ने एक कार्ययोजना बनाकर शासन को मंजूरी के लिए भेजी है। उसकी मंजूरी का इंतजार है। -आरआर जारौलिया, सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर, नगर निगम, भोपाल

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