भोपाल के सोमवारा चौराहा, पीरगेट के पास स्थित मां भवानी मंदिर आज ‘कर्फ्यू वाली माता’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसका निर्माण सन 1980-81 में हुआ था। इससे पहले अश्विन मास की नवरात्रि में यहां मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती थी। उस समय पूरे इलाके के लोग मिलकर अस्थायी प्रतिमा की स्थापना और पूजन करते थे। धीरे-धीरे भक्तों ने स्थायी मंदिर बनाने का निर्णय लिया, लेकिन स्थापना के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में भक्तों और प्रशासन के बीच तनातनी बढ़ी और करीब 15-20 दिन तक पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा रहा। इसी संघर्ष के बीच भक्तों ने माता भगवती की मूर्ति स्थापित की। यही वजह है कि यह मंदिर ‘कर्फ्यू वाली माता’ के नाम से जाना जाता है। अजब परंपरा और कहानी मंदिर में भक्त अपनी मनोकामना नारियल पर लिखकर माता को चढ़ाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा यहां पूरी होती है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित नरेश अवस्थी बताते हैं कि मां के दरबार से आज तक कोई खाली नहीं गया। जिसने भी सच्चे मन से मांगा, उसकी हर अर्जी मां भगवती ने पूरी की है। उनका कहना है कि मंदिर का इतिहास संघर्ष से जुड़ा है, इसलिए मां की शक्ति भी अपार मानी जाती है। पूजा-पाठ और दर्शन व्यवस्था
नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। रोज सुबह 5 बजे मंदिर के पट खुलते हैं और 6:30 बजे आरती होती है। सामान्य दिनों में शाम को 5 बजे से रात 11:30 बजे तक दर्शन होते हैं। नवरात्रि में समय बढ़ाकर रात 1 बजे तक रखा जाता है। अष्टमी और नवमी पर पूरे दिन मंदिर खुले रहते हैं। नवमी पर विशेष हवन और पूजन होता है, जबकि दशहरे के दिन रात्रि 1 बजे तक भक्त दर्शन कर सकते हैं। अष्टमी और नवमी को मंदिर परिसर में भक्तों का भारी जमावड़ा होता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, कन्या पूजन और चुनरी चढ़ाने जैसी विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं। भक्त की आस्था की कहानी
भोपाल के शिवम लखेरा पिछले 25 सालों से इस मंदिर में आ रहे हैं। वे बताते हैं कि यहां जो भी भक्त मनोकामना लेकर आता है, वह पूरी होती है। कुछ महीने पहले मेरी पत्नी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। ऑपरेशन से पहले मैं सुबह 5 बजे सबसे पहले माता के दरबार पहुंचा। मां की कृपा से बड़ा संकट टल गया और ऑपरेशन नॉर्मल रहा। यह माता का सच्चा दरबार है। यहां आने वाले हर भक्त को माता का आशीर्वाद जरूर मिलता है।


