भास्कर न्यूज | राजनांदगांव स्टेट हाई स्कूल मैदान में चल रही कृपालु महाराज की प्रचारिका सुश्री धामेश्वरी देवी की आध्यात्मिक प्रवचन शृंखला के पांचवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया। वेद और शास्त्रों के प्रमाण सहित बताया कि बुद्धि से भगवान को जाना नहीं जा सकता लेकिन भगवान की कृपा हो जाए तो भगवान की बुद्धि दिव्य शक्ति उसे मिले तो साधारण मनुष्य भगवान को जान सकता है। भगवत कृपा के बिना भगवान को नहीं जाना जा सकता। वास्तव में भगवान की कृपा का सही अर्थ शास्त्रों और संतों से समझना होगा। सगुण साकार भगवान ही कृपा करते हैं। इनकी कृपा के बिना माया-निवृत्ति नहीं होती। भगवान की कृपा के सिद्धांत का मतलब यह नहीं की सब कुछ भगवान करेंगे। हमें भी कर्म करने की जरूरत है कर्म का मतलब मन से हरि गुरु का स्मरण एवं उनकी मानसी सेवा यह भक्ति रूपी पुरुषार्थ है। विश्व के अधिकांश महानुभाव यह कह दिया करते है कि ईश्वर की इच्छा बिना कुछ नहीं हो सकता। कुछ लोग कोटेशन द्वारा प्रत्येक कर्म के लिए भगवान को जिम्मेदार ठहराते है। उसे जैसा करना होता है, करा लेता है। लेकिन यह बात गलत है। ईश्वर ने हमें मनुष्य देह दिया, कर्म करने की शक्ति दी। चाहे हम अच्छे कर्म करे, चाहे बुरे कर्म। भगवान उन कर्मों का हिसाब रख कर फल देते है। फिर हम कह देते है, हमारे भाग्य में नहीं है। अथवा भगवान को दोषी ठहराते है। बहुत लोग भगवान की कृपा का गलत मतलब लगाते हैं कि सब ईश्वर कराते हैं।


