भरूवाडीह/सैहा/गुमा| छेरछेरा हमारे छत्तीसगढ़ के अन्न दान का महत्हत्वपूर्ण लोकपर्व त्योहारों में एक मात्र ऐसा त्योहार है जिसमें उत्साह पूर्वक बच्चों से लेकर बुढ़े और स्त्री से लेकर पुरुष भाग लेते हैं। रामधुनी, सेवा समितियों की मिसाल है कि छेरछेरा मांगकर चरौदा के राम मंदिरों जैसे अनेकों नामचीन मंदिरों के निर्माण कराये गये हैं। यह पर्व में तुरतुरिया, चरौदा और पौंसरी तथा सोमनाथ जैसे स्थानों धार्मिक आस्था के पारंपरिक मेला लगते हैं। खासतौर पर्व को ग्रामीण परिवेश के पौनी पसारी अर्थात राऊत ,नाई, धोबी, लोहार एवं नौकर चाकरों तथा लेन देन के हिसाब-किताब का पारंपरिक लोकपर्व को विशेष तौर से मनाए जाते हैं।


