जल संसाधन विभाग के भाखड़ा-सिद्धमुख रेगुलेशन खंड ने भाखड़ा प्रणाली की नहरों के लिए साप्ताहिक वरीयताक्रम जारी कर दिया है। यह नया वरीयताक्रम 3 से 11 फरवरी तक प्रभावी रहेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए समय पर पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है। जारी वरीयताक्रम के अनुसार अमरपुरा (एएमपी) नहर में 140 क्यूसेक, रोड़ांवाली (आरआरडब्ल्यू) में 228 क्यूसेक, नवां-सतीपुरा (एनडब्ल्यूएन) में 239 क्यूसेक, मोरजण्डा (एमजेडी) में 452 क्यूसेक, प्रतापपुरा (पीटीपी) में 582 क्यूसेक, नाथवाना (एनटीडब्ल्यू) में 613 क्यूसेक, रतनपुरा (आरटीपी) में 625 क्यूसेक और मोडिया (एमओडी) नहर में 805 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जाएगा। इसी तरह, सूरतपुरा (एसटीपी) में 814 क्यूसेक, दीनगढ़ (डीएनजी) में 827 क्यूसेक, हरिपुरा (एचRP) में 840 क्यूसेक, लोंगवाला (एलजीडब्ल्यू) में 985 क्यूसेक, पीलीबंगा (पीबीएन) में 1200 क्यूसेक, जोड़कियां (जेआरके) में 1280 क्यूसेक, सूरतगढ़ (एसटीजी) में 1400 क्यूसेक, भगतपुरा (बीजीपी) में 1438 क्यूसेक, संगरिया (एसएनजी) में 1444 क्यूसेक, नगराना (एनजीडी) में 1452 क्यूसेक, लीलांवाली (एलएलडब्ल्यू) में 1692 क्यूसेक, भाखरांवाली (बीकेडब्ल्यू) में 1697 क्यूसेक, करनीसिंह (केएसडी) में 2027 क्यूसेक तथा मम्मड़खेड़ा (एमएमके) नहर में 2222 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक नहर को आठ दिन तक पूर्ण रूप से चलाने के बाद बंद किया जाएगा। यह चक्र सुनिश्चित करेगा कि सभी क्षेत्रों को बारी-बारी से पानी मिल सके। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नहरों में पानी के उतार-चढ़ाव या अन्य तकनीकी कारणों से यदि किसी प्रकार का रेगुलेशन परिवर्तन आवश्यक हुआ, तो भाखड़ा-सिद्धमुख रेगुलेशन खंड तथा जल संसाधन खंड प्रथम व द्वितीय के अधिशासी अभियंताओं से विचार-विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा। वास्तविक जल प्रवाह संबंधित अधिशाषी अभियंता की मांग के अनुसार रखा गया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर कभी भी घटाया जा सकता है।


