भास्कर न्यूज| महासमुंद बसना ब्लाक के ग्राम तरेकेला में हर साल आयोजित होने वाले श्रीमद् भागवत कथा इस वर्ष गंभीर विवादों के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों के आक्रोश और विरोध के बीच जिस स्थान पर वर्षों से भागवत कथा का आयोजन होता आ रहा था, वहां इस बार कथा आयोजन को लेकर अवरोध उत्पन्न किया गया। विवाद की जड़ दान में दी गई आश्रम की भूमि को निजी भूमि बताए जाने और उसी आधार पर कथा स्थल पर रोक लगाए जाने से जुड़ी हुई है। ग्रामीणों और दानदाता परिवार का आरोप है कि आश्रम की लगभग 11 एकड़ दान की भूमि को गोपालदास ने अपने निजी स्वार्थ के लिए आश्रम सहित अपने नाम पर दर्ज करा लिया गया है। इसी भूमि पर वर्षों से धार्मिक आयोजन व श्रीमद्भागवत कथा होती आ रही है, लेकिन इस वर्ष गोपालदास ने पिथौरा एसडीएम कार्यालय में आवेदन देकर प्रशासनिक आदेश के माध्यम से कथा स्थल पर रोक लगवाई गई, जबकि कथा की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। टेंट और पंडाल को हटवा दिया गया इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। इस मामले में दानदाता दाऊ परिवार, सरपंच व ग्रामीण एकजुट होकर भागवत कथा के पक्ष में खड़े हैं। दानदाता मोतिलाल दाउ का कहना है कि यह केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था और परंपरा पर सीधा प्रहार है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भगवान की पावन भागवत कथा तक को रोकने का प्रयास कर आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया। ग्रामीणों ने मुख्तियार हरिश्चंद दास पर गोपालदास का सहयोग करने व कथित रूप से गलत दस्तावेज तैयार कराए और दान की भूमि को निजी नाम में दर्ज कराने में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने दान की भूमि से जुड़े सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस मामले में बसना एसडीएम बजरंग वर्मा से संपर्क किया गया उन्होंने फोन नहीं उठाया।


