भास्कर न्यूज़ | संबलपुर ग्राम तेंदुआ में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन गुरुवार को कथा प्रवचन हुआ। मुंगेली निवासी कथावाचक पंडित आकाश उपाध्याय ने भागवत महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और चेतना जागरण की प्रक्रिया है, जो मानव को ईश्वर से जोड़ती है। श्रीमद् भागवत शब्द में भ का अर्थ भक्ति, ग का ज्ञान और व का अर्थ वैराग्य है। इन तीनों तत्वों के माध्यम से ही त अर्थात भवसागर से तरना संभव होता है। भागवत कथा जीवन में संतुलन, संयम और सदाचार का मार्ग दिखाती है। कथा के माध्यम से मनुष्य के भीतर छिपी नकारात्मक प्रवृत्तियों का शमन होता है और आत्मा शुद्ध होती है। पंडित उपाध्याय ने भगवान श्रीकृष्ण और गिरिराज गोवर्धन की महिमा का भी भावपूर्ण वर्णन किया। कहा कि गिरिराज गोवर्धन केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि साक्षात दिव्यता के प्रतीक हैं। बृजमंडल में स्थित गोवर्धन जी के दर्शनों के लिए आज भी देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। गोवर्धन जी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। गिरिराज की प्रतिमा को 56 भोग अर्पित: कथा के दौरान गाय के गोबर से निर्मित, वैदिक मंत्रों से गिरिराज जी की प्रतिमा को 56 भोग अर्पित किया गया। भोग अर्पण के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। ज्ञान यज्ञ के दौरान संगीतमय कथा, भजन और कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा श्रवण करते नजर आए।


