भागवत कथा मनोरंजन का नहीं आत्म रंजन का विषय: ब्रजबिहारी

श्री जगद्गुरु परमार्थिक न्यास के तत्वावधान में गोविंद देवजी मंदिर के पास स्थित जगद्गुरु आश्रम में चल रही श्रीमद् भगवद कथा में शनिवार को व्यासपीठ से आचार्य डॉ. ब्रजबिहारी ने प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि भावगत कथा सुनने की नहीं पीने की वस्तु है। यह ऐसा रसायन है जो पी लेगा, उसके राग को दूर करके अनुराग पैदा करती है। जहां राग होगा वहां द्वेष होगा, यश होगा और अपयश भी होगा, लाभ होगा वहां हानि भी होगी। भागवत का रसपान करने पर भक्त को भगवान से अनुराग हो जाता हे। विवेक जागृत हो जाता है। इसलिए भागवत कथा मनोरंजन का प्रदर्शन नहीं आत्म रंजन का विषय है। एक अन्य प्रसंग में उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा ध्यान संसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है। मानव जीवन का उद्देश्य भावगत प्राप्ति है। उत्तर काशी के स्वामी अक्षयानंद महाराज, हरिद्वार के स्वामी राजेश्वराश्रम महाराज कथा में आरती उतारी। इस दौरान महेश झालानी, सत्य नारायण तिवाड़ी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *