लेखराज गौड़ आहोर क्षेत्र के किसानों को यूरिया की भयंकर किल्लत झेलनी पड़ रही है। इसी अभाव के बीच भाद्राजून ग्राम सेवा सहकारी समिति की एक बड़ी मांग को इफको कंपनी ने ऐसे सप्लाई के जाल में फंसा दिया कि समिति के करीब 16 लाख रुपए एक वर्ष तक लॉक हो गए। बता दें कि भाद्राजून जीएसएस ने जून में 1400 बैग यूरिया की मांग की थी, लेकिन इफको ने किसानों की बुवाई का सीजन निकल जाने के बाद नवंबर में 1000 बैग डीएपी और नैनो डीएपी भेज दिया, वो भी तब जब क्षेत्र में डीएपी की जरूरत बिल्कुल नहीं थी। भाद्राजून क्षेत्र में भाद्राजून खेती क्षेत्र पूरी तरह बारिश आधारित है। यहां खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुवाई बारिश रुकने के साथ जुलाई-अगस्त तक शुरू हो जाती है। ऐसे में डीएपी का प्रमुख उपयोग जुलाई से अगस्त तक होता है, जबकि नवंबर में इसकी जरूरत लगभग समाप्त हो जाती है। लेकिन इफको ने 13 नवंबर को 1000 बैग डीएपी भेज दिया। इस माल के आने तक गेहूं व चना बुवाई का समय समाप्त हो चुका था। समिति ने 19 जून को मांग-पत्र के साथ एडवांस राशि के लिए ब्लैंक चेक जमा करा दिया था। बावजूद इसके डीएपी सप्लाई नहीं दिया गया। बाद में इफको ने नैनो यूरिया की टेंगिंग के बिना यूरिया न देने की शर्त रखी। मजबूरी में 1 सितंबर को 18 लाख रुपए बतौर एडवांस जमा कराए गए। इसके बावजूद जरूरी यूरिया समय पर नहीं मिला और अब बेकार होने वाला डीएपी भेज दिया दिया गया। जबकि इसकी अब जरुरत नहीं है। इस जबरन सप्लाई से 13.50 लाख रुपए डीएपी के और 2.30 लाख नैनो डीएपी के ब्लॉक हो गए। साथ ही 75 हजार 600 रुपए के नैनो यूरिया के 14 कार्टन भी थोंप दिए गए। कुल मिलाकर करीब 16.50 लाख रुपए फंस गए। एडवांस मांगने पर समिति से एक सितम्बर को 18 लाख भेजे गए। इसका फायदा उठाकर जून माह में की गई डिमांड का डीएपी 4-5 माह बाद नवंबर में भेजकर समिति के करीब 15-16 लाख ब्लॉक करवा दिए। बुवाई से पहले डीएपी की जरूरत होती है तब बार-बार कहने के बावजूद नहीं भेजा। – प्रहलादसिंह, व्यवस्थापक, भाद्राजून ग्राम सेवा सहकारी समिति भाद्राजून सहकारी समिति की ओर से जून व सितम्बर से डीएपी की डिमांड की जा रही थी। उस समय पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध नहीं होने से नवंबर में भेजा। वैसे नवंबर तक गेहूं चने की बुवाई होती है, इसलिए उनके द्वारा की गई डिमांड के आधार पर डीएपी भेजा है। – श्रेयांश गुप्ता, प्रतिनिधि इफको कंपनी जालोर


