भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है संस्कृत भाषा

भास्कर न्यूज | गढ़वा जीएन कॉन्वेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल में संस्कृत दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कक्षा 5, 6 और 7 छात्र- छात्राओं के बीच मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक सह शिक्षाविद मदन प्रसाद केशरी व उपप्राचार्य बसंत ठाकुर ने दीप जलाकर व मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक मदन केशरी ने कहा कि भारत संस्कृति, कला, धर्म, अध्यात्म और जीवन दर्शन का अद्वितीय संगम वाला देश है। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और भारत ने ही सबसे पहले मानवता को धर्म, दर्शन और विज्ञान सिखाया। इतिहास, परंपरा और संस्कृति में भारत का कोई सानी नहीं। भारत एक अनोखा देश है, जहां मास महीना को भी एक विशेष दर्जा मिला है। उसी कड़ी में सावन पूर्णिमा है। इस अवसर पर संस्कृत दिवस मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर ऋषियों का स्मरण तथा पूजा की जाती है। ऋषि ही संस्कृत,साहित्य के आदि स्रोत हैं, इसलिए इस दिन को ऋषि पर्व और संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। संस्कृत भाषा भारत की सबसे प्राचीन भाषा है। संस्कृत भाषा से ही दूसरी भाषाओं की उत्पत्ति हुई है। आज के समय में सबसे कम बोली जाने वाली भाषा संस्कृत है। लेकिन इस भाषा के महत्व को हर कोई जानता है। इसके द्वारा ही दूसरी भाषा को सिखने-बोलने में मदद मिलती है। यह एक कर्ण प्रिय और प्रभावी वाली वाला भाषा है। संस्कृत दिवस को पहली बार वर्ष 1969 में मनाया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी संस्कृत के महत्व को समझे और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। इस अवसर पर सुभाषितानि, मंत्र, गायत्री मंत्र, नीति श्लोक आदि गायन प्रतियोगिता के माध्यम से आयोजन किया गया। जिससे बच्चों का लगाव संस्कृत भाषा की ओर हो सके। इस प्रतियोगिता में आयुष धर दुबे ने प्रथम, कार्तिक धर दुबे ने द्वितीय, एवं रोहन केशरी व शिवम मिश्रा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक वीरेंद्र शाह, विकास कुमार, खुर्शीद आलम, मुकेश भारती ,कृष्ण कुमार, नीरा शर्मा,नीलम कुमारी, सरिता दुबे, सुनीता कुमारी, शिवानी कुमारी, रागिनी कुमारी, चंदा कुमारी, ऋषभ श्रीवास्तव, पूजा प्रकाश, संतोष प्रसाद की भूमिका सराहनीय रही।

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