भारत में मलेशिया के मास्टरमाइंड ने की 1100-करोड़ की ठगी:मीटिंग करने जयपुर आते थे सरगना; मोबाइल एजेंट उपभोक्ताओं के नाम से रजिस्टर्ड सिम भेजते थे

भारत के लोगों से मलेशिया के चार मास्टरमाइंड किंगपिन कंबोडिया में बैठकर ठगी कर रहे थे। ये चारों मलेशिया से दिल्ली आते थे। उसके बाद जयपुर में एक होटल में सिम कलेक्शन करने वाले सरगनाओं से मीटिंग करते थे। यहां मोबाइल की दुकानों और एजेंट से सिम लेकर जाते थे। एजेंट इन सभी सिम को धोखाधड़ी से उपभोक्ताओं के नाम से इश्यू करवाते थे। इसके बाद इन्हें देते थे। पुलिस को 5 हजार 378 सिम ऐसी मिली है, जिनके खिलाफ साइबर ठगी की 1 हजार 102 करोड़ के फ्रॉड की शिकायतें मिली है। ये सभी शिकायत पूरे भारत में की गई थी। राजस्थान में 200 से ज्यादा मोबाइल नंबरों का दुरुपयोग कर 25 करोड़ से ज्यादा का फ्रॉड किया गया है। जोधपुर पुलिस ने मामले 6 एजेंटों को गिरफ्तार है। अब सिलसिलेवार पढ़िए, पूरा मामला मलेशिया के चारों मास्टरमाइंड के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी
जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट ओमप्रकाश ने बताया- मामले के मास्टरमाइंड मलेशिया के किंगपिन ली जियान हुई, लो दी खेन, चिन यू मिंग और लिओंग केन नेथ है। चारों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी करवाया गया है। वहीं राजस्थान समेत पंजाब के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। ऐसे मामला आया सामने
पुलिस को ट्रेडिंग, इन्वेस्टमेंट के नाम पर ठगी की शिकायत मिल रही थी। इनपुट मिला कि शेयर में इन्वेस्ट से लेकर साइबर ठगी के बड़े खेल को कंबोडिया में बैठकर साइबर क्रिमिनल चला रहे हैं। जोधपुर में भी कंबोडिया में बैठकर साइबर ठगी करने के दो मामले पिछले साल भगत की कोठी ओर एयरपोर्ट थाने में दर्ज किए गए थे। इन मामलों में पुलिस ने करीब डेढ़ महीने तक गहनता से पड़ताल की। जांच में सामने आया कि कंबोडिया में बैठकर जो साइबर ठगी की जा रही है, उसमें भारत की सिम का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने इस पूरे खेल को बेनकाब करने के प्रयास शुरू किए। साइबर फ्रॉड्स को पकड़ने नई रिवर्स ट्रेड एनालिसिस को अपनाया
कमिश्नरेट ने बताया- पहली बार जोधपुर आयुक्तालय ने नई रिवर्स ट्रेड एनालिसिस का प्रयोग किया, जिसमें नीचे से नहीं बल्कि इस पूरे खेल में ऊपर से कौन शामिल है उनकी पड़ताल शुरू की। जांच सामने आया कि साइबर ठगों ने कंबोडिया से भारत की सिमों का प्रयोग किया था। सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में 3 लाख 20 हजार ऐसे सिम थे, जो इंडिया से एक्टिव हुए और कंबोडिया में काम कर रहे थे। इस तरीके से गिरोह का हुआ खुलासा 1- पांच हजार से ज्यादा सिम से भारत में 1 हजार 102 करोड़ का फ्रॉड किया
कमिश्नर ने बताया- इन सिम की जांच करने पर सामने आया कि 3 लाख 20 हजार में से लगभग 36 हजार सिम ऐसी थी, जो रोमिंग में काम कर रही थी। इसकी जांच करने पर 5 हजार 378 सिम ऐसी मिली, जिनके खिलाफ साइबर ठगी की 1 हजार 102 करोड़ के फ्रॉड की शिकायतें मिली। ये सभी शिकायत पूरे भारत में की गई थी। इन मोबाइल नंबरों की पड़ताल में एक सिम मुराद खान पुत्र बरकत खान निवासी लक्ष्मी नगर सांगरिया (जोधपुर) के नाम से रिजस्टर्ड होना सामने आया। ये सिम एजेंट प्रकाश भील ने जारी की थी। इस सिम को एक्टिवेट करने के बाद 11 अप्रैल 2025 को कंबोडिया भेजा गया था। इस सिम के जरिए तेलंगाना के साइबराबाद में एक पीड़ित के साथ 89 लाख 42 हजार 225 रुपए की ठगी की गई थी। इस पर परिवादी मुराद खान ने जोधपुर में मामला दर्ज करवाया था। 2- जोधपुर से एजेंट ब्लक में सिम मलेशिया भेजता था
मामले में सिम एजेंट आरोपी प्रकाश भील पुत्र किशनाराम भील निवासी खेड़ी सालवा को गिरफ्तार किया था। आरोपी से पूछताछ में सामने आया कि वो अपने अन्य सिम विक्रेता साथियों के साथ एक गिरोह के रूप में काम करता है। ये गिरोह सिम विक्रेताओं के अलग-अलग कंपनियों के POS पर आने वाले ग्राहकों को शिकार बनाता था। भोले-भाले और कम पढ़े-लिखे ग्राहक जो नई सिम लेने आते थे, उन्हें अंगूठा सही से नहीं लगा बोलकर दोबारा एक ओर सिम ले लेते थे। एक सिम कस्टमर को दे देते थे और दूसरी सिम राहुल कुमार झा के मार्फत मलेशिया के आरोपियों तक पहुंचा देते थे। मलेशिया के आरोपी इन सिम से कंबोडिया में ठगी करते थे। आरोपी इस तरह से 200, 500 से 1000 सिम इकट्ठे करने के बाद उसे मलेशिया भेजते थे। एजेंट को प्रति सिम 200 से 500 रुपए का लालच दिया जाता था। 3- जयपुर के होटल में करते थे मीटिंग
इस पूरे ठगी के खेल के मास्टर माइंड मलेशिया के चार लोग है। ये किंगपिन मलेशिया से आकर दिल्ली रहें। इसके बाद दिल्ली से आकर जयपुर में एक होटल में सिम कलेक्शन करने वाले सरगनाओं से मीटिंग करते थे। यहां से इन सिमों को मलेशिया ले जाया जाता था। इनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है। 4- एक साथ 20,000 से ज्यादा सिम को रिचार्ज करते थे
पुलिस की जांच में सामने आया कि एक साथ 20,000 से ज्यादा इन सिमों को रिचार्ज किया जाता था। सिंगापुर की एक कंपनी भारत के ऑपरेटर के जरिए इन सिमों को रिचार्ज करवाती थी। रोमिंग में होने की वजह से ये सिम विदेश में भी चल जाती थी। अब सिम बंद करवाएगी पुलिस
कमिश्नर ने बताया- आने वाले समय में अब 5400 सिमों को बंद करवाया जाएगा। इन सिमों से चालू व्हाट्सएप को भी बंद करवाया जाएगा, जिससे साइबर ठगी को रोका जा सकें। वहीं रोमिंग में चल रहे 36 हजार अन्य मोबाइल नंबरों की भी जांच की जाएगी। जोधपुर में पुलिस ने सिम जारी करने के मामले में एक मामला भी दर्ज किया है। इसमें जो भी आरोपी शामिल हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों से कई सिम, फिंगर प्रिंट मशीन भी बरामद की है। इस पूरे मामले का खुलासा करने में स्पेशल सेल के कॉस्टेबल रामदयाल की भूमिका रही। इसके लिए पुलिस को करीब डेढ़ माह का समय लगा। इन आरोपियों को किया गिरफ्तार 1. सिम डिस्ट्रीब्यूटर हेमंत पंवार (40) पुत्र सुरेश पंवार निवासी गांव कृष्ण मंदिर के पास, कांगरवाडा गांधी चौक पुलिस थाना कोतवाली जिला नागौर 2. सिम विक्रय एजेंट रामावतार राठी पुत्र (24) जुगल किशोर राठी निवासी मकान नंबर 02 सुराणा की बारी, बंशीवाला मंदिर के पास पुलिस थाना कोतवाली जिला नागौर 3. हरीश मालाकार (34) पुत्र वीरु मालाकार निवासी मकान नं. 709, वार्ड नं. 31 मदनगंज किशनगढ़ अजमेर 4. मोहम्मद शरीफ (22) पुत्र मोहम्मद सदीक निवासी मकान नं. 82 इन्द्रा कोलोनी सांगरिया फांटा, सालावास रोड पुलिस थाना बासनी जोधपुर 5. संदीप भट्ट (27) पुत्र मोहन भट्ट निवासी मकान नंबर 15 ए . राजकीय स्कूल के पीछे, मंगली नीची पुलिस थाना फोकल पोईन्ट जिला लुधियाना पंजाब 6. प्रकाश भील (27) पुत्र निवासी गांव खेडी सालवा पुलिस थाना डांगीयावास जिला जोधपुर पुर्व हाल किराएदार सुरेश प्रजापत का मकान, अमरावती नगर सांगरिया पुलिस थाना बासनी जोधपुर को गिरफ्तार किया गया है।

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