ग्वालियर के सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा और उनकी टीम पर दर्ज कथित झूठे प्रकरणों के विरोध में भिंड के अधिवक्ता एकजुट हो गए। बुधवार को जिला अधिवक्ता संघ के बैनर तले वकीलों ने नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और इसे वकीलों पर सीधा हमला बताया। ग्वालियर के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा और उनकी टीम के खिलाफ बीते दिनों एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इस कार्रवाई को लेकर प्रदेशभर के अधिवक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। भिंड में भी लगातार इसका विरोध हो रहा है। बुधवार को अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान वकीलों ने पुलिस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए जमकर नारेबाजी की और झूठे मुकदमों को तत्काल रोकने की मांग की। मनुस्मृति दहन पर कार्रवाई न होने का आरोप
अधिवक्ता संतोष शर्मा ने बताया कि खनियाधाना में मनुस्मृति जलाए जाने की घटना के बाद सनातन धर्म के अनुयायियों पर सीधा हमला किया गया, लेकिन धार्मिक ग्रंथ जलाने वालों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, एक विचारधारा का पुतला दहन किए जाने मात्र पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा और उनकी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया। हाईकोर्ट से राहत के बाद भी विरोध
अधिवक्ताओं का कहना है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा को जमानत भी दी, इसके बावजूद यह कार्रवाई वकीलों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण है। इसे अधिवक्ता समाज पर हमला मानते हुए पुरजोर विरोध किया जा रहा है। ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें अधिवक्ताओं ने मांग की कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर केंद्र सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार कर विधि अनुसार कार्रवाई करे।


