भीड़ ने आरक्षक का सिर फोड़ा…वर्दी फाड़ी:शिवपुरी भाजपा जिलाध्यक्ष बोले- पुलिस ने सरकार को डिब्बे में डाल रखा; TI को सस्पेंड कराने पर अड़े

शिवपुरी जिले के रन्नौद थाने के बाहर शनिवार शाम वाहन चेकिंग के दौरान काटे गए चालान को लेकर बड़ा बवाल हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि भीड़ ने आरक्षक के साथ मारपीट कर उसकी वर्दी फाड़ दी और पत्थर मारकर सिर फोड़ दिया। विवाद वाहन चेकिंग के दौरान हुआ। म्याना क्षेत्र निवासी मनोज जाटव अपनी कार में थे। कार में गर्भवती पत्नी और अन्य लोग सवार थे। पुलिस ने सीट बेल्ट और दस्तावेजों की जांच कर चालान काट दिया। इसी दौरान मनोज का साला निलेश जाटव (निवासी रन्नौद) अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और विरोध करने लगा। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई। ड्यूटी कर रहे आरक्षक को घेर लिया, जमकर मारपीट की
आरोप है कि भीड़ में शामिल महिला-पुरुषों ने ड्यूटी पर तैनात आरक्षक अवधेश शर्मा को घेर लिया और मारपीट की। इस दौरान आरक्षक के सिर पर पत्थर मारा गया, जिससे वह गंभीर घायल हो गया। घटना का एक 9 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरक्षक के साथ मारपीट होती दिख रही है। इसके बाद परिजन ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव कर दिया। रात करीब 11 बजे भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। धरना रात ढाई बजे तक चला। देखिए मारपीट और हंगामे की तस्वीरें…
भाजपा जिलाध्यक्ष बोले-मुझे मुंह छुपाकर निकलना पड़ रहा
धरने के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव ने पुलिस अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने थाना प्रभारी और एसडीओपी से कहा- आपने भाजपा और उसकी सरकार को डिब्बे में डाल रखा है। इतनी चालानी कार्रवाई कर रहे हो कि मुझे मुंह छुपाकर निकलना पड़ रहा है। उन्होंने थाना प्रभारी को तत्काल सस्पेंड करने और दोषी आरक्षकों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। TI बोले- एक परसेंट भी गलती हुई तो अभी इस्तीफा दे दूंगा
जिलाध्यक्ष के तीखे तेवरों के बीच रन्नौद थाना प्रभारी ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा- अगर एक प्रतिशत भी गलती मेरी पाई जाती है तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं। पूरे परिसर में कैमरे लगे हैं, आप देख सकते हैं। पढ़िए जिलाध्यक्ष और पुलिस के बीच बहस के दौरान बातचीत
जिलाध्यक्ष (थाना प्रभारी से): क्या ड्यूटी है तुम्हारी? (एसडीओपी की ओर मुड़कर) थाना प्रभारी को सस्पेंड करो अभी और उन आरक्षकों पर एफआईआर करो। उस महिला को हॉस्पिटल लेकर चलो और उसका मेडिकल कराइए अभी।
थाना प्रभारी: भाईसाहब, मेरी एक परसेंट गलती हो तो जो दंड देना चाहो वो दे देना। पूरे परिसर में कैमरे लगे हैं, देख सकते हो। जिलाध्यक्ष: तो क्या महिलाओं को मारोगे?
थाना प्रभारी: किसी ने नहीं मारा उसको। अगर गलती निकली तो रिजाइन दे दूंगा।
एसडीओपी: एसडीएम पहले जांच कर लें इस मामले की, तब कार्रवाई करेंगे। जिलाध्यक्ष: वो जांच होगी, तब अगर जांच में निकला तो वो बरी हो जाएंगे। मेरा निवेदन है आप उन सिपाहियों पर एफआईआर कराइए। 6 घंटे हो गए यहां और तुम निर्णय नहीं ले रहे हो, क्या चाहते हैं आप लोग? कानून का राज नहीं है, तुम्हारा राज है। तुमने भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार को डिब्बे में डाल रखा है।
एसडीओपी: थानेदार के खिलाफ तो जो लोग धरने पर बैठे हैं, उन्हें भी शिकायत नहीं है। जिलाध्यक्ष: थानेदार की ही जिम्मेदारी होती है एसडीओपी साहब। इस जगह कैप्टन की जिम्मेदारी होती है। मैं आज आठ दिन से देख रहा हूं क्षेत्र में, मुझे मुंह छुपा कर निकलना पड़ रहा है। कितने पुलिस वाले हैं जो हेलमेट पहनते हैं? मुझे सब पता है। गर्भवती महिला से मारपीट का आरोप, वीडियो भी आया
जाटव परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले मारपीट की, जिससे एक गर्भवती महिला और बच्चे को चोट आई है। इसी बात पर उन्होंने चक्काजाम किया। हालांकि, घटना के बाद एक अन्य वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिला अपने बच्चे के साथ सामान्य रूप से घूमती दिख रही है। ASP के भरोसे पर रात 2:30 बजे खत्म हुआ धरना
हंगामे को देखते हुए आसपास के थानों का बल बुलाना पड़ा। शनिवार देर रात एडिशनल एसपी संजीव मुले मौके पर पहुंचे और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाकर रात 2:30 बजे धरना खत्म हुआ। एसडीओपी संजय मिश्रा ने बताया कि घायलों की एमएलसी कराई गई है, जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

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