भीलवाड़ा में यूआईटी द्वारा शहर के कई स्थानों पर पुराने कियोस्कों को खाली करने के आदेश जारी करने के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है।मंगलवार को बड़ी संख्या में कियोस्क संचालक कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ यूआईटी पहुंचे ओर आज जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंच जो कियोस्क रेग्यूलर चल रहे हैं उन्हें नहीं तोड़ने के लिए ज्ञापन दिया। इन कियोस्क से हमारी रोजी रोटी चलती है कियोस्क संचालक मनोज गांछा ने बताया की वो करीब 25 साल से यहां लोहे वेल्डिंग की दुकान चला रहे हैं उनके घर की रोजी-रोटी इसी कियोस्क से चल रही है, अब अचानक से यूआईटी ने इसे तोड़ने का फरमान जारी कर दिया। हम लोग कहां जाएं ओर क्या करें।इसलिए हमारे कियोस्क को नहीं तोड़ा जाए ओर जो खंडहर हो चुके हैं या उपयोग में नहीं आ रहे उनको यूआईटी तोड़ दे। तुगलकी फरमान जारी करना गलत है पीसीबी मेंबर मनोज पालीवाल ने बताया कि शहर के सभी कियोस्क को एक साथ तोड़ने का आदेश जारी किया है, लेकिन जिनमें व्यापार चल रहा है, उनको नहीं तोड़ा जाए उनको व्यापार करने का अवसर दिया जाए। सरकार गरीब आदमी को व्यापार करने देने, रोजगार उपलब्ध कराने के लिए है। आम लोगों को बेरोजगार करने के लिए नहीं है,अगर इनसे कोई समस्या है तो उसका बातचीत से समाधान किया जाए ,व्यवस्था सुधारने की बात होनी चाहिए ना की तुगलकी फरमान जारी कर तोड़ने की। अगर फिर भी यूआईट नहीं मानी तो सभी कियोस्क संचालक बड़ा आंदोलन करेंगे। इनका टाइम पूरा हो चुका है ओर ये अब जर्जर हो चुके हैं यूआईटी सचिव ललित गोयल ने बताया की भीलवाड़ा शहर में इन कियोस्क को लगभग 25 साल पहले बनाया गया था।10 साल की अवधि के लिए आवंटित किए गए थे,जो अब पूरी हो चुकी है।मौके पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि ये कियोस्क जर्जर और असुरक्षित स्थिति में हैं, जिससे किसी भी समय जान-माल की हानि की संभावना बनी रहती है।सड़क पर यातायात भी प्रभावित हो रहा है।इसलिए निर्देश दिया है कि इन कियोस्कों को दो दिन के भीतर खाली किया जाए, यूआईटी आमजन की जान माल की सुरक्षा और यातायात सुगमता सुनिश्चित करने के लिए कियोस्कों को तोड़ने की कार्रवाई करेगा।


