मानसून को प्रदेश से विदा लिए हुए करीब 3 माह हो चुके हैं। मानसून यानी बारिश का सीजन शुरू होने से पहले उदयपुर जिले में भूजल स्तर 10.4 मीटर पर था। इसका मतलब यह था कि इतनी गहराई पर जाने के बाद पानी मिल रहा था। 25 जून को मानसून ने प्रवेश किया और 2 अक्टूबर को विदाई ली। इस बीच 698.3 मिमी बारिश हुई। यह औसत बारिश 617.7 मिमी से 80.6 मिमी यानी 13 फीसदी ज्यादा रही। बारिश के बाद भूजल स्तर 5.4 मीटर ऊपर की ओर चढ़ा और अब महज 4.9 मीटर पर आ गया है। दरअसल, भूजल विभाग हर साल बारिश से पहले यानी प्री-मानसून और इसके बाद यानी पोस्ट मानसून के भूजल स्तर का सर्वे कराता है और आंकड़े जारी करता है। विभाग ने सर्वे करा लिया है। भास्कर के पास इसके आंकड़े हैं। सर्वे नवंबर-दिसंबर माह में किया गया। इसके लिए जिले को 17 ब्लॉक में बांटा गया। सर्वे के दौरान सायरा में भूजल की स्थिति सबसे अच्छी रही और यहां 2 मीटर नीचे ही पानी उपलब्ध है। सबसे खराब स्थिति लसाड़िया ब्लॉक की है। यहां 8.2 मीटर नीचे जाने पर पानी मिल रहा है। उदयपुर शहर के गिर्वा ब्लॉक की बात करें तो यहां 7.07 मीटर पर पानी उपलब्ध है। खेरवाड़ा में सबसे ज्यादा 10.9 मीटर पानी रिचार्ज, अब महज 3.3 मीटर पर
भूजल विभाग की ओर से प्री-मानसून इस साल 15 मई से 30 जून के बीच किया गया था। अब किए गए पोस्ट मानसून सर्वे के लिए हर 10 से 15 वर्ग किमी में पीजोमीटर (4 इंच के ट्यूबवैल) स्टेशन बनाए गए। इसके अलावा 500 से ज्यादा खुले कुओं और पीजोमीटर स्टेशन के जरिये भूजल की मॉनीटरिंग की गई। ट्यूबवेल में डिजीटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए और इनके जरिये जलस्तर रिकॉर्ड किया गया। सबसे ज्यादा जलस्तर खेरवाड़ा में बढ़ा है। यहां मानसून से पहले 14.28 मीटर पर पानी था। मानसून के बाद 10.97 मीटर बढ़कर महज 3.3 मीटर पर आ गया है। सेमारी और फलासिया में भूजल सबसे कम रिचार्ज हुआ। यहां मानसून से पहले करीब साढ़े 8 मीटर पर पानी था। अब पांच-साढ़े पांच मीटर पर आया है। सुखद संकेत…पिछले साल जितनी ही बारिश, मानसून से पहले का भूजल स्तर भी समान, फिर भी इस साल 1.6 मीटर ऊपर आया पानी जिले में इस बार औसत से सिर्फ 13 फीसदी अधिक बारिश हुई। यह 6 साल में तीसरी सबसे कम बारिश रही। इसके बावजूद 6 साल में दूसरी बार मानसून के बाद भूजल सबसे अच्छी स्थिति में है। अभी 4.9 मीटर नीचे जाने पर पानी उपलब्ध है। इससे पहले 2022 में औसत से 44 फीसदी अधिक पानी गिरा था। तब भी 4.9 मीटर नीचे जाने पर ही पानी मिल रहा था। सबसे अच्छी स्थिति 2019 में रही। उस समय 68 फीसदी अधिक बारिश हुई और मात्र 3.6 मीटर पर ही भूजल उपलब्ध था। चौकाने वाली बात यह है कि 2023 और 2024 में लगभग बराबर बारिश हुई। दोनों ही सालों में बारिश से पहले भूजल स्तर भी लगभग बराबर यानी 10 मीटर के आसपास रहा। इसके बावजूद पिछले साल के मुकाबले इस बार भूजल 1.6 मीटर ऊपर ही मिल रहा है। भूजल स्तर ऊपर रहने के ये कारण
पिछले साल 2023 में विधानसभा चुनावों के कारण भूजल स्तर दिसंबर और जनवरी माह में मापा गया था। तब तक पानी का स्तर नीचे चला जाता है। इस कारण दोनों साल में बारिश भले ही लगभग बराबर हुई, लेकिन पोस्ट मानसून भूजल स्तर में अंतर आ गया, जबकि प्री-मानसून के दौरान का भूजल स्तर बराबर ही था। इस साल मानसून सीजन के शुरुआती दिनों यानी जून-जुलाई के ज्यादातर दिनों में बारिश नहीं हुई। आखिर में सितंबर की बारिश से ही पूरे मानसून का कोटा पूरा हुआ। इस कारण सितंबर-अक्टूबर में इस बार सभी झील, तालाब, जलाशय लबालब थे। ऐसे ही ग्राउंड वाटर भी रिचार्ज रहा। जब भूजल मापा गया तो पानी का जलस्तर अच्छा रहा। पिछले साल जून-जुलाई में ही भारी बारिश हो गई थी, जबकि अगस्त व सितंबर में काफी कम बारिश हुई थी। यह भी एक बड़ी वजह है।


