भेदभाव, नफरत सहित 10 बुराइयों को हराने का संकल्प:बड़वानी के कुकरा बसाहट राजघाट पर गांधी जयंती मनाई, मेधा पाटकर भी शामिल हुईं

बड़वानी जिला मुख्यालय के पास कुकरा बसाहट में गुरुवार को महात्मा गांधी की 156वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की प्रमुख मेधा पाटकर, कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई सहित बड़ी संख्या में एनबीए और कांग्रेस कार्यकर्ता कुकरा बसाहट स्थित गांधी स्मारक (राजघाट) पहुंचे और बापू की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। बता दें कि बड़वानी जिले में भी बापू का एक राजघाट है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी के किनारे था। अब सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में है। दिल्ली के बाद यह वही स्थान था जहां महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी और नर्मदा पार से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी महादेव देसाई की अस्थियां लाई गई थीं। कुकरा बसाहट में स्मारक की स्थापना मूल रूप से बड़वानी में नर्मदा किनारे स्थित राजघाट 17 जुलाई 2017 को सरदार सरोवर बांध के डूब की जद में आ गया था। इसके बाद रातो-रात महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई की अस्थियां वहां से निकालकर कुकरा बसाहट में स्थापित की गईं, जिसे अब गांधी स्मारक कहा जाता है। हर साल 2 अक्टूबर को इस स्थान पर गांधी जी की जयंती मनाई जाती है। गांधी के विचारों को मिटाने की कोशिशें: मेधा पाटकर गांधी जयंती पर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि “कुछ शक्तियां महात्मा गांधी जी के विचारों को मिटाने की कोशिशें कर रही हैं। वे भूल गए हैं कि यह विचार पूर्ण रूप से लोगों के दिमाग और दिल में बस चुके हैं।” उन्होंने सत्य, अहिंसा और ग्राम स्वराज के महात्मा गांधी के संदेश को आज के समय में बेहद जरूरी बताया। पाटकर ने कहा, “हमारा सत्यवादी और सत्याग्रही होना सत्य ही ईश्वर है। अहिंसा परमो धर्म।” एनबीए प्रमुख ने इस अवसर पर 10 बुराइयों को हराने का संकल्प लेने की बात कही, जिसमें हर भेदभाव और नफरत को छोड़ने, नशा से मुक्त होने, महिलाओं पर हो रहे अत्याचार रोकने, किसानों की आत्महत्याएं खत्म करने, जल, जंगल, जमीन, नदी और पहाड़ पर होता आघात नकारने, ग्राम सभा की अवमानना नहीं सहने और संवैधानिक अधिकार नकारने वालों को चुनौती देने जैसे मुद्दे शामिल थे। महादेव भाई देसाई: बापू के सचिव और परिवार के सदस्य कार्यक्रम में बापू के 25 साल तक सचिव रहे महादेव भाई देसाई को भी याद किया गया। उन्हें उस समय के प्रबुद्धजन “सेवक हो तो महादेव भाई देसाई जैसा” कहकर पुकारते थे। महादेव भाई देसाई बापू के सचिव ही नहीं, उनके परिवार के एक सदस्य भी थे। उन्होंने 1917 में महात्मा गांधी के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया था। एक राष्ट्रवादी लेखक और कुशल संपादक महादेव भाई देसाई का निधन 1942 में पुणे के आगा खां महल में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था, तब वह महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी के साथ ही थे। सुविधाओं की कमी पर जताई चिंता मेधा पाटकर ने इस दौरान चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतना समय बीत जाने के बाद भी बापू के स्मारक पर जो सुविधा होनी चाहिए, वह आज तक पूरी नहीं हो पाई है। कार्यक्रम में नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े पुराने साथियों का सम्मान भी किया गया और गांधी भजनों की प्रस्तुति दी गई। कार्यकर्ताओं ने कुकरा बसाहट के अलावा डूब गांव चीखल्दा में भी पानी के बीच खड़े होकर गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

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