भेल भोपाल ने दावा किया है कि हबीबगंज क्षेत्र में सालों पहले बने एमएसमई क्लस्टर से 180 करोड़ निर्यात के साथ-साथ 350 करोड़ टर्नओवर पहुंच चुका है। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का दावा है कि इस क्षेत्र में भविष्य में 200 करोड़ और निवेश आ सकता है। हालांकि, ये क्लस्टर न तो राज्य, न ही केंद्र की एमएसएमई क्लस्टर लिस्ट में शामिल है।
भेल भोपाल द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सालों से आईएसबीटी क्षेत्र में स्थापित इस क्लस्टर में 14 एमएसएमई इकाइयां मौजूद हैं और 5 हजार से अधिक परिवारों के लिए रोजगार भी मिल रहा है। प्रेसिजन मैन्युफैक्चरिंग, फैब्रिकेशन, कंपोनेंट प्रोडक्शन और इंजीनियरिंग सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में काम हो रहा है। ये उत्पादन से देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों-पावर जेनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, रक्षा उपकरण और हेवी इंजीनियरिंग एप्लिकेशन्स- को मदद कर रहे हैं। इस क्लस्टर से देश में सप्लाई के साथ-साथ यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया की अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को सेवाएं दी जा रही हैं। विस्तार, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमेशन से 200 करोड़ का निवेश आने की संभावना है। कानूनी विवाद, MSME में मर्जर का भी था प्रस्ताव लगभग 50 साल पहले स्थापित क्लस्टर में जमीन का विवाद कोर्ट में लंबित है। भेल ने जब जमीन वापस मांगी तो यहां के उद्योगपति 1985 में कोर्ट चले गए थे। बीते साल ये प्रस्ताव भी बना था कि इस क्लस्टर को एमएसएमई विभाग में मर्ज कर दिया जाए पर मामला कोर्ट में होने के कारण अब तक मामला आगे नहीं बढ़ सका है। भेल के भी एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि लंबे समय से जमीन से जुड़े विवाद कई सालों से रहे हैं। भोपाल में जमीन की कमी के बीच यहां काफी संभावनाएं हैं।


