मप्र को चालू वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार से कुल 44,355.83 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन वित्तीय वर्ष के 10 माह बीत जाने के बाद भी सिर्फ 9,753.05 करोड़ रुपए ही राज्य को प्राप्त हुए हैं। यानी अब तक केवल 22 फीसदी राशि ही दिल्ली से भोपाल पहुंच पाई है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 22 विभागों को 1 अप्रैल से 20 जनवरी के बीच केंद्र से एक रुपया भी नहीं मिला है। परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी योजनाओं के लिए भी एक रुपया नहीं मिला, जिससे किसानों से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसी प्रकार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को जल जीवन मिशन के तहत 8,561.22 करोड़ मिलने थे, लेकिन 10 महीने में एक भी रुपया जारी नहीं हुआ। ऊर्जा विभाग को आरडीएसएस योजना के तहत 1,736.33 करोड़ मिलने थे, लेकिन पूरी राशि लंबित है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मप्र की जनता भाजपा की डबल इंजन सरकार से डबल मुसीबत में फंस गई है। एक तरफ राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार प्रदेश को उसके हिस्से का पैसा नहीं दे रही। 22 विभाग और इनको मिलने वाली राशि, जो नहीं मिली लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी- 8561.22 {ऊर्जा विभाग-1,736.33 {खाद्य विभाग-317.31 {पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक-296.15 {पशुपालन एवं डेयरी 156.29 {उद्यानिकी एवं खाद्य-146.74 {पंचायत-142.95 {उच्च शिक्षा – 133.69 {आयुष-93.42 तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास व रोजगार- 86.56 {नर्मदा घाटी विकास-68 {मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास-57.25 {राजस्व 50 {कुटीर और ग्रामोद्योग-15.79 {जेल-15.11 {पर्यावरण-12.34 {विज्ञान और प्रौद्योगिकी-11.39 {नवीन और नवकरणीय ऊर्जा-8.99 {सहकारिता-8.07 {योजना, आर्थिक और सांख्यिकी-7.9 {परिवहन-4.45 {श्रम-1.24 करोड़। अब सिस्टम बदल गया है। भारत सरकार से राशि राज्य सरकार को जारी नहीं होती है, बल्कि स्पर्श सिस्टम हो गया। जब आप बिल लगाते हैं तो राशि ड्रा हो जाती है। कोई भी विभाग अपने उपयोगिता प्रमाण पत्र लगाएगा तो उनकी राशि जारी हो जाएगी। – मनीष रस्तोगी, एसीएस, वित्त विभाग


