धार की ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार को बसंत उत्सव कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच मनाया गया। बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन होने के कारण भोजशाला में विशेष प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्थाएं की गई थीं। परिसर में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड हवन-पूजन संपन्न हुआ, जबकि प्रशासन ने एक निर्धारित हिस्से में दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुम्मे की नमाज अदा करवाई। दरअसल, बसंत पंचमी पर अखंड पूजा की अनुमति के लिए हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस पर 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अखंड पूजा और नमाज दोनों को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया था। जिला प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के पालन में दोनों धार्मिक गतिविधियों को संपन्न करवाया। अब इस पूरे मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज करवाई गई है। शनिवार को मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। आरोप लगाया कि उन्होंने प्रशासन को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि नमाज उनके तय स्थान पर और सीमित संख्या में करवाई जाए। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने हमारे साथ धोखा किया है। हमारे नाम पर डमी नमाज करवाई गई, जो स्वीकार्य नहीं है।” ‘कलेक्टर ने मुस्लिम समाज को विश्वास में नहीं लिया’
मुस्लिम समाज के सदर ने सीधे तौर पर धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने मुस्लिम समाज को विश्वास में नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भावना के विपरीत नमाज करवाई गई। अब्दुल समद ने चेतावनी दी कि यह मामला केवल नमाज का नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता का है। उन्होंने कहा कि यदि इस विषय पर मुस्लिम समाज को न्याय नहीं मिला, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।


