भोपाल के वन मेले में 2 लाख लोग पहुंचे:लोगों को खूब भाए मोटे अनाज-जौ से बने व्यंजन; लाखों की जड़ी-बूटियां बिकीं

भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में 17 दिसंबर से चल रहे अंतरराष्ट्रीय वन मेले का सोमवार शाम को समापन होगा। सात दिन चले मेले में करीब 2 लाख लोग पहुंचे। जिन्होंने लाखों रुपए की जड़ी-बूटियां भी बिकीं। लोगों को मोटे अनाज और जौ से बने व्यंजन खूब भाए हैं। वन मेले में 300 से ज्यादा स्टॉल लगे थे। जहां करीब 50 लाख रुपए की जड़ी-बूटियां बिक गई। इस बार मेले में आंवला एवं इससे बने उत्पाद जैसे आंवला कैंडी, अचार, सुपारी और शहद, हर्बल टी, अर्जुन चाय, गुड़ और बांस के ब्रश से लेकर सोफा, कुर्सियां, लकड़ी के खिलौने, गुड्डे-गुड़िया एवं हर्बल जड़ी-बूटियों की मांग अधिक रही। लोगों को ये भी भाया
वन विभाग एवं राज्य लघु वनोपज, सहकारी संघ मर्यादित द्वारा लगाए गए इस मेले में लोगों का रुझान बढ़ा। हर रोज एवरेज 30 हजार लोग पहुंचे। मोटे अनाज कोदो-कुटकी, मक्का-बाजरा और जौ से बने व्यंजन आगंतुकों के मन को खूब भाए। मेले में 300 से ज्यादा स्टॉल लगे थे। वहीं, 90 से अधिक वैद्य ने लोगों का उपचार किया। मंत्रियों की मौजूदगी में समापन
खेल मंत्री विश्वास सारंग के मुख्य आतिथ्य, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की अध्यक्षता में 7 दिवसीय वन मेले का समापन हुआ। महापौर मालती राय भी मौजूद रहीं। समापन समारोह में अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक लघु वनोपज विभाष कुमार ठाकुर और वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहें। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शनी अवॉर्ड भी दिए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शनी का पहला अवॉर्ड लघु वन उपज केन्द्र बरखेड़ी भोपाल, दूसरा स्थान इको टूरिज्म और तीसरा स्थान सामाजिक वाणिकी का रहा। जिला यूनियन अवॉर्ड क्रमश: यूनियन पश्चिम बैतूल, यूनियन पूर्व छिंदवाड़ा और जिला यूनियन भोपाल को मिला। शासकीय स्टॉल का पहला स्थान विंध्य हर्बल बरखेड़ा पठानी भोपाल, दूसरा स्थान छत्तीसगढ़ का स्टॉल और तीसरा रेहटी ग्राम वन समिति को मिला। वहीं, निजी स्टॉल में पहला पचमढ़ी आयुर्वेद, दूसरा जमानी खादी समिति जबलपुर और तीसरा एसके फार्मा नागपुर को मिला। वन धन केंद्र में पहला श्योपुर, दूसरा उत्तर सिवनी और तीसरा पूर्व मंडला का रहा। आयुर्वेदिक कॉलेज में पहला मानसरोवर कॉलेज, दूसरा कॉलेज एलएनसीटी आयुर्वेदिक कॉलेज और तीसरा पुरस्कार सत्य साईं कॉलेज को दिया गया।

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