भोपाल के स्कूलों को निशाना बना रहे साइबर ठग:​​​​​​​महाराणा प्रताप स्कूल के शिक्षकों को कॉल कर मांगी फंड की जानकारी; विभाग ने जारी किया अलर्ट

​​​​​भोपाल के सरकारी स्कूलों को साइबर ठगों ने निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ठग अपने आप को शिक्षा विभाग का अधिकारी बताकर शिक्षकों से स्कूल फंड, बैंक डिटेल और गोपनीय जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शासकीय महाराणा प्रताप माध्यमिक विद्यालय, जहांगीराबाद से सामने आया है। स्कूल के प्राचार्य महेंद्र प्रताप उब्बर ने इस मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी है। ठग ने ‘Sir G’ नाम से फोन कर खुद को विभाग से जुड़ा बताते हुए स्कूल फंड की जानकारी मांगी। विद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीर मानते हुए समस्त शिक्षकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और अन्य स्कूलों को भी ऐसे फ्रॉड कॉल्स से सावधान रहने की सलाह दी है। शिक्षा विभाग ने इस घटना को साइबर फ्रॉड मानते हुए जांच और निगरानी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 27 सितंबर को सुबह 9 बजे से 10:30 बजे के बीच स्कूल के शिक्षकों को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया। कॉलर ने खुद को “विभागीय अधिकारी” बताते हुए कहा कि स्कूल से संबंधित जानकारी तत्काल भेजी जाए। कॉल “8873051157” नंबर से किया गया था और Truecaller पर उसका नाम Sir G दिख रहा था। विभाग का नाम लेकर मांगी जानकारी
कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्कूल फंड ट्रांसफर और बैंक खाते की गतिविधियों के बारे में पूछताछ की। जब शिक्षकों को शक हुआ तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना प्राचार्य को दी। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने फ्रॉड कॉल्स की सूची तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट भेजी। विद्यालय के प्राचार्य महेंद्र प्रताप उब्बर ने कहा कि यह घटना संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने का सुनियोजित प्रयास प्रतीत होती है। उन्होंने बताया कि सभी स्टाफ सदस्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी कॉल पर बैंक या फंड से जुड़ी जानकारी साझा न करें और हर संदिग्ध कॉल की तुरंत रिपोर्ट करें। जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी रिपोर्ट
घटना की पूरी जानकारी भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी को भेज दी गई है। रिपोर्ट में ऐसे आठ शिक्षकों के नाम शामिल हैं, जिन्हें संदिग्ध कॉल आए थे। इनमें अनिल शर्मा, सुनीता दुबे, मालती यादव, गीता श्रीवास्तव, तिलोत्तमा कुशवाहा, कृष्णा श्रीवास्तव, अनिता भगवेल और पूनम नेगी शामिल हैं। प्राचार्य ने शिक्षा विभाग से अनुरोध किया है कि सभी स्कूलों को इस तरह की ठगी से सतर्क रहने के निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही, शिक्षकों से कहा गया है कि विभागीय जानकारी केवल अधिकृत ईमेल या लिखित पत्राचार के माध्यम से ही साझा की जाए।

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