भोपाल बायपास पर मध्य प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2019 से लेकर अक्टूबर 2025 तक 270.29 करोड़ रुपए का टोल टैक्स वसूला है। नेशनल हाईवे 12 पर स्थित यह 52 किलोमीटर लंबा बायपास निवेशक कंपनी ट्रॉन्सट्राय प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया था। खास बात यह है कि रखरखाव नहीं होने के चलते बीते अक्टूबर महीने में यही सड़क धंस गई थी। जिसने जमकर सुर्खियां बटोरी थीं। इससे पहले, टोल का संचालन करने वाली कंपनी ने कलेक्शन को कम दिखाकर स्क्रू अकाउंट में पैसा जमा नहीं किया था। इसके बाद सरकार ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया और खुद टोल वसूली शुरू कर दी थी। इसको लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सवाल पूछा। पीडब्ल्यूडी विभाग से मिले जवाब पर विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में कहा कि भोपाल बायपास पर राज्य सरकार ने अवैध टोल वसूला है। यह बंद होना चाहिए। गड़बड़ी पर कंपनी को किया था ब्लैकलिस्ट
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि यह बायपास निवेशक कंपनी ने बनाया था। कंपनी ने स्क्रू अकाउंट में गंभीर गड़बडियां कीं और प्रतिदिन की टोल आय 10.5 लाख रुपए होने के बावजूद उससे कहीं कम राशि दर्ज की। सरकार ने इस गड़बड़ी पर 11 दिसंबर 2019 को निवेशक से टोल कलेक्शन का अधिकार छीन लिया था। 12 दिसंबर 2019 से सरकार ने स्वयं टोल वसूली शुरू कर दी, जो अक्टूबर 2025 तक जारी रही। इसी पर आपत्ति जताते हुए प्रताप ग्रेवाल ने कहा- सरकार ने किस नियम से टोल वसूला? यह इंडियन टोल एक्ट के विपरीत अवैध वसूली है। 6 साल तक टोल वसूला, रखरखाव नहीं किया
विधायक ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने 6 साल तक टोल वसूला, लेकिन 52 किमी बायपास पर रखरखाव का एक भी बड़ा काम नहीं किया। जिसके कारण सड़क जर्जर होती रही और आखिरकार उसका एक पुल धंस गया। कांग्रेस विधायक ने कहा- यह राज्य शुल्क का दुरुपयोग है। टोल बेनामी तरीके से वसूला नहीं जा सकता। सरकार को भोपाल बायपास पर तुरंत टोल वसूली बंद करनी चाहिए। कंपनी ने टोल की राशि छिपाई
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने भोपाल बायपास परियोजना में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, निर्माण में सुस्ती तथा स्क्रू अकाउंट में गड़बड़ी के कारण ट्रॉन्सट्राय प्राइवेट लिमिटेड को 22 फरवरी 2021 को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। आदेश में कहा था कि कंपनी ने तय शर्तों का पालन नहीं किया। टोल वसूली की वास्तविक राशि छिपाई। कई नोटिसों के बावजूद न तो जवाब दिया और न ही सुधार के प्रयास किए। आदेश के अनुसार, एक स्वतंत्र एजेंसी ने 17 से 26 जून 2019 तक 7 दिन की टोल मॉनिटरिंग की। जिसमें पाया गया कि कंपनी द्वारा दिखाया गया टोल कलेक्शन वास्तविक वसूली से बहुत कम था। इसके बाद स्क्रू अकाउंट की विस्तृत जांच हुई। जिसमें ‘अंडर रिपोर्टिंग’ और ‘पब्लिक मनी लॉस’ की पुष्टि हुई। अनियमितताएं बढ़ीं, काम बंद पड़ा
सरकार ने कंपनी को 11 दिसंबर 2019 और 17 जुलाई 2020 को दो नोटिस जारी किए। कंपनी ने न कोई जवाब दिया और न गुणवत्ता या प्रगति में सुधार किया। इसके बाद कंपनी का टोल वसूली अधिकार निलंबित कर दिया गया और अंततः कंसेशन एग्रीमेंट समाप्त हो गया। आदेश में MPRDC ने कहा था कि कंपनी के कारण परियोजना की प्रगति बाधित हुई। सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ। एग्रीमेंट की मूल भावनाओं का उल्लंघन हुआ। इन्हीं आधारों पर कंपनी को मध्य प्रदेश में भविष्य में किसी भी सड़क परियोजना या निविदा में भाग लेने से प्रतिबंधित (ब्लैकलिस्ट) कर दिया गया। मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भोपाल में 100 मीटर सड़क धंसी भोपाल के बिलखिरिया के पास एक सड़क का करीब 100 मीटर का हिस्सा धंस गया। इसके बाद एक तरफ का रास्ता बंद करा दिया गया है। यह सड़क एमपीआरडीसी की है, जो इंदौर, होशंगाबाद, जबलपुर, जयपुर, मंडला, सागर को जोड़ती है। पढ़ें पूरी खबर…


