भौगोलिक स्थिति को जानने पहुंचे नेशनल जियोग्राफिक की टीम:पैलेस ऑन व्हील्स में आए 53 पर्यटक, दुर्ग के आर्किटेक्चर को देखकर हुए खुश

शाही ट्रेनों में शुमार पैलेस ऑन व्हील्स अपने 11वें फेरे में शुक्रवार शाम को चित्तौड़गढ़ पहुंची, जो देर रात को यहां से रवाना हुई। इस राउंड में 45 फॉरेनर और 8 इंडियन थे। इनमें से 32 पर्यटक अमेरिका से आए हुए थे। इस ट्रेन में अमेरिका से आए नेशनल जियोग्राफिक की टीम भी पहुंची। टीम ने चित्तौड़गढ़ फोर्ट पर पहुंचकर उसकी भौगोलिक स्थिति को जाना। उन्होंने दुर्ग के आर्किटेक्चर की तारीफ की और कहा कि अभी तक देखे हुए फोर्ट में सबसे ज्यादा सुंदर किला चित्तौड़गढ़ का है। लेकिन साथ ही सभी पर्यटक दुर्ग पर रोड ठीक नहीं होने के कारण काफी निराश भी हुए। सभी मॉन्यूमेंट्स को निहारा शाही ट्रेन इंडिया सहित आठ देशों के 53 पर्यटकों के साथ चित्तौड़गढ़ पहुंची। पर्यटकों का पहले रेलवे स्टेशन के बाहर फोटो खिंचवा गए। जिसके बाद उन्हें लग्जरी बसों में दुर्ग ले जाया गया। पर्यटकों को कुम्भा महल, फतेह प्रकाश महल, मीरा मंदिर, विजय स्तंभ, कालिका मंदिर, गौमुख, पद्मिनी महल दिखाया गया। इसके बाद पर्यटकों ने देर शाम लाइट एंड साउंड का आनंद लिया। पर्यटकों के वापस आया शाही ट्रेन में लौटने के बाद यह रात के करीब 2 बजे रवाना हुई। इस ट्रिप में 32 अमेरिका, 8 इंडिया, 6 इंग्लैंड, 2 साउथ अफ्रीका, 1 जर्मनी, 1 ऑस्ट्रेलिया, 1 कनाडा, 1 न्यूजीलैंड और 1 वियतनाम से पर्यटक आए थे। ट्रिप में नेशनल ज्योग्राफिक की टीम भी पहुंची थी। यह टीम अपने एजुकेशनल टूर पर थी। इस टीम को दिल्ली के एक्सपीडिशन कंपनी के कमल कांत गुप्ता ने एस्कॉर्ट किया। वहीं, टीम को दुर्ग पर त्रिलोक सालवी, नरेंद्र सिंह राठौड़ (दीपपुरा), विनोद सालवी और संजीव शर्मा ने गाइड किया। दुर्ग के रास्ते टूटी सड़के देख निराश हुए पर्यटक गाइड त्रिलोक सालवी ने बताया कि पूरी टीम अलग-अलग देशों में जाकर वहां के लैंडस्केप के बारे में जानकारी जुटाते हैं। उन्होंने यहां चित्तौड़गढ़ के भी भौगोलिक स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने चित्तौड़गढ़ के इकोनामिक के बारे में भी बातचीत की। साथ ही टूरिज्म के बारे में भी पूछा। उन्हें बताया किया है कि चित्तौड़गढ़ सीमेंट और मार्बल हब है। यहां पर कई बड़ी फैक्ट्री है। टीम यह जानकर सरप्राइज हुए की इतनी सुंदर दुर्ग के होने के बावजूद भी यहां पर पर्यटकों का ठहराव नहीं होता। उन्होंने कहा कि यहां पर ठहरने के लिए फाइव स्टार होटल या अच्छी सुविधाएं होना जरूरी है। वहीं, टीम ने जगह जगह टूटी सड़कों को देखकर निराश हुए। उन्होंने कहा कि अच्छे पर्यटकों की उम्मीद तभी की जा सकती है जब उनके लायक सुविधाएं दी जाए। दुर्ग के रास्ते में भी कई टूटी सड़के देखकर पर्यटकों ने अफसोस जताया। चित्तौड़गढ़ किले के आर्किटेक्चर को देख खुश हुए पर्यटक नेशनल ज्योग्राफिक की टीम ने चित्तौड़गढ़ किले के आर्किटेक्चर को देखते हुए काफी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इससे पहले ऐसा आर्किटेक्चर देखने को नहीं मिला। फतेहपुर सीकरी, जयपुर, दिल्ली वहां सभी मुगल आर्ट है, लेकिन यहां के आर्किटेक्चर को काफी अलग बताया। उन्होंने गाइड त्रिलोक सालवी को यह भी बताया कि सवाई माधोपुर में उन्हें टाइगर नहीं दिखे, जिससे वह निराश हुए। उन्होंने पहली बार ऐसा किला दिखा, जहां पर पब्लिक रहती है। टीम ने माना कि लोगों के रहने की वजह से ही यह किला बचा हुआ है। फिलहाल हाल शाही ट्रेन के अगले फेरे में 80 पर्यटकों की बुकिंग बताई जा रही है। फरवरी महीना पूरा पैक होने से शाही ट्रेन की टीम में भी खुशी का माहौल है।

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