भ्रष्टाचार के आरोप:नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी में गोठान बनाने निकायों को दिए 70 लाख रुपए

कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना अभी बंद नहीं हुई। बल्कि इस योजना के तहत प्रदेश के 11 नगर पालिका और नगर पंचायतों को गोठान बनाने के लिए 60 लाख रुपए दिए गए हैं। इन्हें यह राशि उपयोगिता प्रमाण पत्र स​ब्मिट करने के बाद दी गई है। दरअसल नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी योजना के तहत तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पंचायत स्तर पर गोठान विकसित थे। इसमें ग्रामीण इलाकों में खुले घूमने वाले मवेशियों को रखने के साथ ही उनके लिए पानी-चारे की व्यवस्था की गई थी साथ ही बाद में कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे थे। लेकिन कांग्रेस के सत्ता के जाने के बाद भाजपा नेता भ्रष्टाचार का बड़ा केंद्र बताते हुए इसे बंद करने की बात कहते रहे। लेकिन ठीक दो साल बाद राशि जारी करना यह बताता है कि योजना बंद नहीं हुई न ही इसका नाम बदला गया है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा यह राशि जारी की गई है। गोठानों को गौधाम में बदलने की तैयारी भी
राज्य सरकार ने गौठानों को गौधाम में बदलने की तैयारी कर ली है। यहां चरवाहों और गोसेवकों को मासिक मानदेय मिलेगा, चारा-पानी की व्यवस्था होगी और बेहतर संचालन पर रैंकिंग के साथ ईनाम भी दिए जाएंगे। वित्त ने इसे मंजूरी दे दी है और पशुधन विभाग ने कलेक्टरों व फील्ड अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है। 1800 से ज्यादा क्रियाशील गोठान थे प्रदेश में
प्रदेश में 1800 से अधिक गोठान क्रियाशील थे। जबकि 2000 से ज्यादा गोठानों को स्वीकृति दी गई थी। गोठानों में 2 एकड़ जमीन चिन्हित कर चारा शेड, पानी की व्यवस्था, फेंसिंग और चारागाह विकसित किए गए थे। संचालन के लिए पंचायतों में गोठान प्रबंधन समितियाँ बनाई गई थी वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट और गोबर आधारित उत्पादों का निर्माण शुरू किया गया था। योजना के तहत और राशि जारी की जाएगी
नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना के तहत उन निकायों को राशि जारी की गई है जिन्होंने अपनी उपायोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं। इस योजना के तहत आगे भी राशि जारी की जाएगी।
राजेश शर्मा, प्रमुख अभियंता, नगरीय प्रशासन विभाग

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