मंगला बीमा योजना: पशुपालकों में रुझान नहीं, टारगेट 20 हजार आवेदन के 5 दिन बचे, अभी तक 1000 का भी नहीं हुआ पंजीयन

टैग गुम हुआ तो देनी होगी सूचना, पशु की बिक्री पर पॉलिसी होगी समाप्त मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना बीमा प्रक्रिया के बाद पशुपालक को मोबाईल पर एसएमएस के माध्यम से बीमा पॉलिसी का लिंक प्राप्त होगा। यदि बीमित पशु का टैग किसी कारणवश गुम हो जाता है तो उस स्थिति में पशुपालक को बीमा विभाग को सूचना देनी होगी। सूचना मिलने पर 1 दिन के भीतर बीमा विभाग पशु का री-टैगिंग करवाकर पॉलिसी एवं सॉफ्टवेयर में नए टैग की प्रविष्टि करेगा। पशुपालक की ओर से पशु की बिक्री/उपहार दिए जाने की स्थिति में बीमा पॉलिसी समाप्त मानी जाएगी। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत लाभ लेने के लिए सभी जनाधार कार्ड धारक पशुपालक पात्र हैं। पशुपालकों को बीमा विभाग के एप/सॉफ्टवेयर पर आवेदन करना होगा। इसमें मोबाईल ऐप/वेबपोर्टल पर 13 ​दिसंबर से आवेदन शुरू किए गए थे ​जोकि 12 जनवरी होंगे। इसमें बीमा के लिए लॉटरी द्वारा पशुपालकों का चयन किया जाएगा। गोपाल क्रेडिट कार्ड धारक पशुपालक और लखपति दीदी पशुपालकों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए क्रमशः 16 और 12 प्रतिशत आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है। यह बीमा उन्हीं पशुओं का होगा जो किसी अन्य योजना के तहत बीमित नही हो। यह बीमा एक वर्ष के लिए किया जाएगा और पशुपालक को इसके लिए कोई प्रीमियम नहीं देना होगा। बीमा राशि का निर्धारण पशु की नस्ल, उम्र व दुग्ध उत्पादन क्षमता के आधार किया जाएगा लेकिन किसी भी स्थिति में बीमा की अधिकतम राशि 40 हजार रुपए से अधिक नहीं होगी। प्रीमियम की पूरी राशि का भुगतान राज्य सरकार ही करेगी। भास्कर संवाददाता। हनुमानगढ़. सरकार ने भले ही मंगला बीमा योजना के तहत पशुओं को निशुल्क बीमा करने की योजना लागू कर दी है ​लेकिन जिले में पशुपालक इसको लेकर रूचि नहीं दिखा रहे हैं। योजना में लॉटरी से चयन होना है जिसके लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 12 जनवरी है लेकिन जिले में 20 हजार के लक्ष्य के मुकाबले अभी तक महज 1 हजार पशुपालकों ने ही पंजीकरण करवाया है। ऐसे में 5 दिनों में 19 हजार पशुपालकों का पंजीकरण करवाना पशुपालन विभाग के लिए भी चुनौति है। इसमें बड़ा कारण पशुपालकों में जागरूकता का अभाव और योजना का प्रचार-प्रसार नहीं होना बताया जा रहा है। बता दें कि योजना का क्रियान्वयन ट्रस्ट मोड पर राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग की ओर से किया जाएगा जबकि पशुपालन विभाग नोडल विभाग है। राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग (साधारण बीमा) विभाग चयनित पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत/ राजस्व ग्राम हेतु तिथिवार कार्यक्रम निर्धारित करेगा जिसकी सूचना पशुपालकों को एसएमएस या अन्य माध्यम से दी जाएगी। बीमा के लिए पशुओं की टैगिंग अनिवार्य है। चयनित पशुपालक के अधिकतम 2 दुधारू पशु (गाय, भैंस अथवा दोनों )/10 बकरी/ 10 भेड़/1 उष्ट्र वंश पशु का निःशुल्क बीमा किया जाएगा। पशुओं के बीमा के लिए निर्धारित उम्र अनुसार गाय की उम्र 3 से 12 वर्ष और भैंस की 4 से 12 वर्ष होनी चाहिए। इसी प्रकार बकरी और भेड़ की उम्र 1 से 6 वर्ष जबकि ऊंट की उम्र 2 से 15 वर्ष होनी चाहिए। बताया जा रहा है कि प्रदेश में 5 लाख पशुपालकों की ओर से पंजीयन के बाद ही लॉटरी होगी लेकिन अभी तक करीब 1 लाख पंजीयन ही हुए हैं। पंजीयन कम होने पर सभी आवेदकों को योजना का लाभ मिल सकता है। इन स्थितियों में पशु की मौत पर ही मिलेगा क्लेम योजना के तहत किसी भी प्राकृतिक या आकस्मिक दुर्घटना जैसे आग लगने, सड़क दुर्घटना, आकाशीय बिजली गिरने, प्राकृतिक आपदा, जहरीला घास खाने या सर्प/ कीड़ा काटने, किसी बीमारी आदि में मृत्यु होने पर बीमा क्लेम मिलेगा। पशुपालक को बीमा पॉलिसी जारी होने पर दुर्घटना जैसे आग लगने, सड़क दुर्घटना, आकाशीय बिजली गिरने, प्राकृतिक आपदा, जहरीला घास खाने या सर्प/कीड़ा काटने की स्थिति को छोड़ कर 21 दिवस के ग्रेस पीरियड के बाद ही पशु की मृत्यु होने की स्थिति में क्लेम/दावा भुगतान का लाभ दिया जाएगा। संयुक्त निदेशक- ऑनलाइन पंजीकरण के लिए को कर रहे हैं प्रेरित पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. हरीशचंद्र गुप्ता का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजना की शुरूआत की गई है। इसका मकसद अमूल्य पशुधन का बीमा कर पशुपालकों को पशुधन हानि होने पर सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत पंजीकरण के लिए पशुपालकों को प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीण जनप्रतिनिधि और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग भी पशुपालकों को पंजीयन के लिए प्रेरित करें ताकि पशुधन को निशुल्क बीमित किया जा सके। बीमित पशु की मृत्यु होने पर पशुपालक द्वारा शीघ्र ही इसकी सूचना बीमा विभाग को देनी होगी। बीमा प्रतिनिधि की ओर से सर्वे तथा पशु चिकित्सक की ओर से मृत पशु का पोस्टमार्टम परीक्षण कर पूरी प्रक्रिया को निर्धारित सॉफ्टवेयर/ऐप में इन्द्राज किया जाएगा। बीमा विभाग द्वारा 21 कार्य दिवस के भीतर मृत बीमित पशु की दावा राशि का भुगतान संबंधित पशुपालक को किया जाएगा। दस्तावेज: पशुपालक का जन आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, आवेदक पशुपालक एवं पशु के साथ फोटो, गोपाल कार्ड/ लखपति दीदी कार्ड(यदि हो तो), जाति प्रमाण पत्र एवं पशुओं के टैग नंबर होना अनिवार्य है।

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