मप्र में गेहूं की सरकारी खरीदी के लिए 7 फरवरी से रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएंगे। मंडियों में औसत भाव कम होने की वजह से इस बार केंद्र द्वारा मप्र को दिया गया गेहूं खरीदी का लक्ष्य मिलना संभव दिख रहा है। ऐसा हुआ तो कोरोना काल के बाद पहली बार प्रदेश ये लक्ष्य हासिल कर लेगा। बीते साल प्रदेश लक्ष्य से लगभग 2 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) ही पीछे रहा था। केंद्र द्वारा घोषित 2585 रुपए के समर्थन मूल्य पर इस बार मप्र में गेहूं की खरीदी होगी। वहीं भोपाल सहित कई मंडियों में औसत वैरायटी का गेहूं लगभग 2400 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। केंद्र द्वारा अभी गेहूं के निर्यात पर बैन नहीं हटाने के निर्णय से भावों में जल्द कोई तेजी आने की सम्भावना नहीं है। केंद्र ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 350 लाख मीट्रिक टन रखा है। पंजाब को 125 एलएमटी, 80 एलएमटी मप्र को तो हरियाणा को 75 एलएमटी खरीद करनी है। कोरोना काल में मप्र में गेहूं की बम्पर पैदावार हुई और इसके बाद बम्पर खरीदी भी हुई। विपणन वर्ष 2020-21 में मप्र ने 129 एलएमटी तो 2021 -22 में 128 एलएमटी गेहूं खरीदा था। फिर प्रदेश हर बार लक्ष्य से पीछे रहा। इन सालों में प्रदेश ने 46 एलएमटी, 71 व 48 एलएमटी खरीदी कर सका।
गेहूं के औसत दाम 2400 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास हैं। निर्यात पर बैन खुलने की सम्भावना नहीं है। सरकारी खरीद में अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी।
हरीश ज्ञानचंदानी, अध्यक्ष भोपाल अनाज मंडी


