खंडवा की कृषि उपज मंडी में शनिवार को आयोजित बैठक के दौरान उस वक्त माहौल गरम हो गया, जब एक किसान ने भरी बैठक में ही एसडीएम और मंडी सचिव को खरी-खोटी सुना दी। किसान ने साफ कहा तीन दिन में समस्या का हल नहीं हुआ तो मंडी में ताला लगा दूंगा। आप एसडीएम हो, लगे तो जेल भेज देना। एसडीएम बार-बार समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन किसान अपनी पीड़ा बयान करता रहा। किसान बोला- नवरात्रि के दिन मंडी बंद क्यों थी
ग्राम भकराड़ा के किसान चंदन राजपूत ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन मंडी में किसी तरह की छुट्टी की सूचना नहीं दी गई थी। उस दिन वह अपनी सोयाबीन उपज लेकर मंडी पहुंचा, लेकिन नीलामी नहीं हुई।राजपूत बोले कि मंडी बंद थी, जबकि अवकाश घोषित नहीं था। 1500 रुपए का डीजल लगा, ड्राइवर दिनभर परेशान होता रहा। यह कौन सी मनमानी है… जब अधिकारी नहीं तो बैठक में क्यों आए
किसान ने एसडीएम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आप मंडी के भारसाधक अधिकारी हैं। मैंने आपको फोन लगाया था, तो आपने कहा कि आप भारसाधक अधिकारी नहीं हैं। फिर आज किस हैसियत से मंडी की बैठक में आए हैं?”इस पर मंडी सचिव ओपी खेड़े ने सफाई दी कि “अरविंद चौहान ही भारसाधक अधिकारी हैं, वे छुट्टी पर हैं। किसान फिर भड़क गया उसने कहा बेवकूफ मत बनाओ। राज्य शासन का आदेश है कि एसडीएम ही मंडी के भारसाधक अधिकारी हैं। अरविंद चौहान तो दो साल पहले एसडीएम थे, अब अपर कलेक्टर बन चुके हैं। झूठ बोलोगे तो पछताओगे। 2400 रुपए में सोयाबीन खरीद रहे, ये कौन सा न्याय है
किसान चंदन राजपूत के साथ जनपद सदस्य और कृषि समिति अध्यक्ष बृजेंद्रसिंह पंवार भी मौजूद थे। उन्होंने मंडी प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा —“जब उपज की नीलामी मंडी में होती है तो तौल 10 किलोमीटर दूर व्यापारी के गोदाम पर क्यों होती है? इसका भाड़ा कौन देगा?यहां 2000 से 2400 रुपए क्विंटल में सोयाबीन खरीदी जा रही है। यह कैसा न्याय है?” मंडी सचिव बोले- कोविड के समय हुआ था निर्णय
मंडी सचिव ओपी खेड़े ने सफाई दी कि यह सभी निर्णय कोविड काल में कलेक्टर स्तर पर हुए थे। उस बैठक में किसान संघ के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अब जो भी बदलाव होगा, कलेक्टर ही करेंगे। इस पर किसान फिर भड़क उठे, कोविड को गए तीन साल हो गए, लेकिन लूटमार जारी है। जिन किसानों के पास जमीन नहीं है, उन्हें बुलाकर चाय-नाश्ता करा देते हो और फैसले उनके साथ लेते हो।


