मंत्री की मौजूदगी में लगे ‘अरावली बचाओ-राजस्थान बचाओ’ के नारे:सिरोही में संयम लोढ़ा बोले- राजस्थान का भविष्य खतरे में

राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला पर अस्तित्व का संकट गहरा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा ने चेतावनी दी है कि यदि अरावली को बचाने के लिए संगठित प्रयास नहीं हुए, तो भविष्य की पीढ़ियों को पानी, जंगल और स्वच्छ पर्यावरण केवल किताबों में ही मिलेगा।
यह बात उन्होंने मारवाड़ मीणा समाज सेवा संस्थान के एक कार्यक्रम में कही, जहां राज्यमंत्री ओटाराम देवासी की मौजूदगी में ‘अरावली बचाओ–राजस्थान बचाओ’ के नारे लगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर चिंता
लोढ़ा ने हालिया सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली की श्रेणी में रखने का निर्णय पर्वतमाला को खत्म करने का रास्ता खोल देगा। उन्होंने बताया कि अरावली की लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियां 100 मीटर से कम ऊंचाई की हैं। ऐसे में यह फैसला खनन माफियाओं के लिए वरदान और पर्यावरण के लिए अभिशाप साबित होगा। ‘अरावली के खत्म होने से भूजल स्तर तेजी से गिरेगा’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अरावली पर्वतमाला का 80 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में स्थित है। यह थार मरुस्थल की रेत को रोकने, भूजल को रिचार्ज करने और जलवायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
लोढ़ा के अनुसार, अरावली के खत्म होने से भूजल स्तर तेजी से गिरेगा, तापमान बढ़ेगा और बीमारियों में वृद्धि होगी। अंततः लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने इसे केवल पहाड़ियों का नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के अस्तित्व का सवाल बताया।
संयम लोढ़ा ने जल, जंगल और जमीन के पारंपरिक रक्षक रहे मीणा समाज से इस लड़ाई में आगे आने का आह्वान किया। इस अवसर पर लोढ़ा ने केंद्र सरकार की नरेगा जैसी श्रमिक हितैषी योजना को कमजोर करने की मंशा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रोजगार छिनने से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और पलायन बढ़ेगा, इसलिए नरेगा को बचाने के लिए जन आंदोलन खड़ा करने की अपील की। कार्यक्रम में लोढ़ा ने राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और अतिरिक्त मुख्य सचिव कुंजीलाल मीणा के साथ प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

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