मंत्री गुलाब देवी ने शिक्षकों को बताया अराजक तत्व:ऑफलाइन ट्रांसफर के लिए मंत्री आवास पर धरना दे रहे शिक्षक, बोलीं-होगी कार्रवाई

ऑफलाइन ट्रांसफर लिस्ट जारी करने की मांग को लेकर यूपी के शिक्षक, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी के आवास पर धरना दे रहे हैं। इन शिक्षकों को मंत्री गुलाब देवी ने अराजक तत्व बताया है। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा- जो लोग इस धरने में बैठे हैं, वे वास्तविक शिक्षक नहीं हैं। विपक्ष के कुछ अराजक तत्व शिक्षकों के नाम पर आंदोलन कर रहे हैं और माध्यमिक शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल करने की कोशिश में लगे हैं। मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि यह अनशन पूरी तरह से विपक्ष की साजिश है। शिक्षकों को विपक्ष के बहकावे में नहीं आना चाहिए। विपक्ष इस धरने को राजनैतिक मुद्दा बनाकर शिक्षकों को भड़काने का काम कर रहा है। ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें चिह्नित किया जा रहा है और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अनशन करना अनुचित है। राज्यमंत्री गुलाब देवी, शनिवार देर रात अपने आवास पर पत्रकारों से बात कर रही थीं। अब 5 बड़े बयान पढ़िए… मुख्यमंत्री के पास है फाइल, जल्द मिलेगा आदेश
मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में है। मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले पर गंभीर हैं। हमने सारी रिपोर्ट और दस्तावेज सीएम को भेज दिए हैं। आदेश मिलते ही ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अभी कोई तय समय सीमा नहीं है, लेकिन सरकार शिक्षकों के हित में ही निर्णय लेगी। यह समय बच्चों की पढ़ाई का, अनशन का नहीं
मंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे धरना खत्म करें और अपने विद्यालयों में लौटें। उन्होंने कहा- यह समय बच्चों की पढ़ाई का है, आंदोलन का नहीं। अगर आप लोग स्कूलों से अनुपस्थित रहेंगे, तो नुकसान विद्यार्थियों का होगा। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जिनके एनओसी पूरे हैं, उन्हें स्थानांतरण का लाभ मिलेगा। बिना अनुमति धरने पर बैठे शिक्षकों पर कार्रवाई होगी
राज्यमंत्री ने चेतावनी दी कि बिना विभागीय अनुमति या अवकाश लिए धरने पर बैठे शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। किसी भी तरह की मनमानी या राजनीतिक दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ दयालु हृदय वाले व्यक्ति
गुलाब देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दयालु हृदय वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने खुद निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों की प्रक्रिया पूरी है, उन्हें न्याय मिले। लेकिन कुछ लोग अनावश्यक रूप से माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार सख्त कदम उठाएगी। जो शिक्षक वास्तव में कार्यरत हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। राजनीति नहीं, शिक्षा पर ध्यान दें शिक्षक
मंत्री ने कहा- शिक्षक समाज का दर्पण होता है। अगर वही अनुशासन छोड़ देगा तो बच्चों को क्या सिखाएगा? मेरा निवेदन है कि शिक्षक आंदोलन की राजनीति से दूर रहें और बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दें। सरकार उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए तत्पर है, लेकिन सड़कों पर अराजकता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। क्या है ऑफलाइन तबादला का मामला? दरअसल, प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त यानी एडेड माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का इस सत्र में ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से आवेदन स्वीकार किए गए। शासन के आदेश के बाद शिक्षकों ने ट्रांसफर के लिए एनओसी लेकर अपनी फाइलें जमा की। विभाग ने ऑनलाइन आवेदनों पर तो निर्णय ले लिया और उनके ट्रांसफर कर दिए गए लेकिन ऑफलाइन आवेदन पेंडिंग ही रह गए। पूरे राज्य में करीब 1700 शिक्षकों ने अपने ट्रांसफर के लिए ऑफलाइन आवेदन किया था। ट्रांसफर न होने से शिक्षक आंदोलित हो गए। यह इसलिए क्योंकि उनको मिली एनओसी अगले साल मान्य नहीं होती। शिक्षक मांग कर रहे हैं कि ऑफलाइन स्वीकार किए गए आवेदनों में लगाए गए एनओसी को शासनादेश जारी कर अगले साल तक के लिए मान्य किया जाए। हालांकि, विभागीय अधिकारी मौखिक तौर पर उसके मान्य होने की बात कह रहे लेकिन शिक्षक लिखित आदेश चाहते हैं। शिक्षकों का कहना है कि उनके इस बार किए गए ऑफलाइन आवेदन और एनओसी को ही अगले सत्र में भी मान्य किया जाए। इसी मांग को लेकर शिक्षक बीते 24 सितंबर से माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी के आवास पर धरना दे रहे। ————————————— ये खबर भी पढ़िए… अली से मिलने पहुंचा था अतीक का सबसे छोटा बेटा..VIDEO:नैनी जेल में जाते दिखा अबान, फिर अली को झांसी जेल किया गया शिफ्ट 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड के बाद माफिया अतीक का साम्राज्य धीरे-धीरे ढह गया। देश-प्रदेश में छापेमारी शुरू हुई तो अतीक के चौथे और पांचवे नंबर के बेटे अहजम और अबान (तब नाबालिग) को पुलिस ने बाल गृह में रख दिया था। इसके बाद 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक-अशरफ की हत्या हुई। तब भी अतीक के बेटे अहजम और अबान बाल गृह में ही रहे। वह पिता और चाचा के जनाजे में शामिल नहीं हो सके थे। इसके बाद अहजम और अबान बाल गृह से निकल कर पुलिस सुरक्षा में घर पहुंच गए। तब से लेकर अभी तक यह दोनों शहर में नहीं देखे गए। दोनों गुमनाम जिंदगी ही जी रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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