ग्वालियर हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए भिंड के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए 28 लाख 9 हजार रुपए के मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में आपराधिक मुकदमों जैसी कठोर साक्ष्य-मानक की अपेक्षा नहीं की जाती, बल्कि संभावना के आधार पर न्याय किया जाता है। यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति हिरदेश बैच ने सुनाया। मामला 2021 दुर्घटना से संबंधित
मामला वर्ष 2021 में हुई एक दुर्घटना से संबंधित है, जिसमें विवेक दुबे की मौत हो गई थी। ट्रिब्यूनल ने मृतक की मासिक आय 18 हजार रुपए मानते हुए क्षतिपूर्ति तय की थी। यह आय दस्तावेज़ साक्ष्यों और वेतन पर्ची के आधार पर निर्धारित की गई थी। बीमा कंपनी ने अपनी अपील में तर्क दिया था कि दावा याचिका देर से दायर की गई थी और मृतक की आय साबित नहीं हो सकी। कंपनी ने यह भी कहा कि चालक की लापरवाही सिद्ध नहीं हुई है। हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दुर्घटना के हालात स्वयं चालक की लापरवाही दर्शाते हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस की चार्जशीट और गवाहियों से भी यह साबित होता है कि दुर्घटना चालक की गलती के कारण हुई थी। क्या है मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) एक विशेष न्यायिक निकाय है जो मोटर वाहन अधिनियम,1988 के तहत स्थापित किया गया है। ताकि मोटर दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवजे से जुड़े मामलों का त्वरित और कुशल न्याय मिल सके। यह न्यायाधिकरण सड़क दुर्घटनाओं के परिणामस्वरूप हुई चोटों, विकलांगता या मृत्यु के लिए वित्तीय राहत प्रदान करता है । जिससे सिविल अदालतों पर बोझ कम होता है और पीड़ितों को त्वरित निवारण मिलता है।


