बैतूल में भावांतर योजना की समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने अधिकारियों से बात की। मंत्री ने कहा मंडियों में केवल पंजीकृत किसानों से ही सोयाबीन की खरीदी की जाए। किसानों को 3 से 17 अक्टूबर तक ई-उपार्जन पोर्टल, पंजीयन केंद्रों या एमपी किसान एप पर अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा। मंत्री पटेल ने चेतावनी दी कि किसानों को गुमराह करने या खरीदी प्रक्रिया में अनियमितताओं में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ग्राम पंचायत स्तर तक योजना का प्रचार-प्रसार किया जाए और मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। जिले में 92,937 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बैठक में बताया कि जिले में 92,937 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई है। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम (07141-299262) और मंडी स्तर पर शिकायत निवारण केंद्र बनाए गए हैं। खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कैमरे और अतिरिक्त सर्वेयर भी नियुक्त किए जा रहे हैं। भावांतर योजना के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसान अपनी उपज अधिसूचित कृषि उपज मंडियों (बडोरा, मुलताई, भैसदेही) में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम पर बेचते हैं, तो सरकार अंतर की राशि सीधे किसान के खाते में जमा करेगी। इसमें दो स्थितियां होंगी- सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,328 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि मंडियों में दो सप्ताह के औसत विक्रय मूल्य को मॉडल मूल्य माना जाएगा। मंत्री पटेल ने स्पष्ट किया कि योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है और किसी भी किसान के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


