बालाघाट नगर पालिका में विकास कार्यों को लेकर विपक्षी कांग्रेस दल ने नगर पालिका अध्यक्ष पर भेदभाव करने और विकास कार्य रोकने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने 3 अक्टूबर से नगर पालिका कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। यह आंदोलन मुख्य रूप से 28 मार्च को परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव क्रमांक 11 से संबंधित है। इस प्रस्ताव के तहत नगर के सभी वार्डों में विकास कार्यों की प्रक्रिया 2 अक्टूबर तक शुरू होनी थी, जो नहीं हुई। विपक्षी कांग्रेस दल ने 17 सितंबर को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को पत्र सौंपकर प्रस्ताव क्रमांक 11 में शामिल सभी 33 वार्डों के विकास कार्यों की प्रक्रिया 2 अक्टूबर तक शुरू करने की मांग की थी। मांग पर कोई ध्यान न दिए जाने के बाद, 2 अक्टूबर को नेता प्रतिपक्ष योगराज कारो लिल्हारे की उपस्थिति में पार्षदों की बैठक हुई, जिसमें आंदोलन का अंतिम निर्णय लिया गया। अध्यक्ष पर गुमराह करने और भेदभाव का आरोप नेता प्रतिपक्ष योगराज कारो लिल्हारे ने नगर पालिका अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष पिछले 6 महीनों से शहर के विकास को लेकर परिषद और जनता को गुमराह कर रही हैं। फाइल बनाने, सामूहिक टेंडर निकालने और 2 अक्टूबर तक निविदाएं जारी करने जैसे कई वादे किए गए, लेकिन एक भी पूरा नहीं हुआ। परिषद में सैकड़ों प्रस्ताव पारित हुए, लेकिन किसी भी प्रस्ताव पर काम नहीं किया गया। शासन की योजनाओं के अलावा निकाय निधि से अध्यक्ष की क्या उपलब्धि है? पूर्व में अरबों के काम निकाय निधि से हुए थे, और इस परिषद में लाखों रुपए के भी निर्माण नहीं किए गए। आंदोलन को मिला विपक्षी पार्षदों का समर्थन लिल्हारे ने दावा किया कि नगर पालिका अध्यक्ष न सिर्फ कांग्रेस पार्षदों, बल्कि भाजपा और निर्दलीय पार्षदों के साथ भी भेदभाव कर रही हैं। उन्होंने बताया कि नगर विकास को लेकर बुलाए गए इस आंदोलन को भाजपा और निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन प्राप्त है, क्योंकि यह सिर्फ कांग्रेस की नहीं, बल्कि उन जनता की लड़ाई है, जिन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।


