मंत्री-सांसदों की नहीं सुनते IAS-IPS?:केंद्रीय मंत्री तक का लेटर आया सामने, जानिए- क्यों जनप्रतिनिधि और अफसरों में हो रहा टकराव

‘मजाक समझ रखा है क्या, मैं मंत्री हूं। आप कहना क्या चाह रहे हो? मैं यहां पर गलत आ गया हूं। मैं किसी को सुनूंगा नहीं क्या? आप करोगे क्या सारे निर्णय…आप ही कर लो फिर?….मैं सीधा मुख्यमंत्री से बात कर लूंगा।’ राजस्थान सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री और सीकर कलेक्टर के बीच दो सप्ताह पहले कुछ इस तरह से टकराव देखा गया था। मंत्री-विधायक-सांसदों और IAS-IPS के बीच टकराव का ये पहला मामला नहीं है। बीते 2 साल में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। कई जनप्रतिनिधियों की अफसरों से नाराजगी की शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का एक IPS पर कार्रवाई को लेकर पत्र भी सामने आया है, जिसमें सरकारी निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। क्या राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी हावी हो रही है? आखिर क्यों बार-बार जनप्रतिनिधि और अफसरों में टकराव बन रहा है? भास्कर ने बीते एक साल में हुई इन घटनाओं और उनके कारणों का एनालिसिस किया। पढ़िए मंडे स्पेशल स्टोरी में… विवाद-1: वन मंत्री संजय शर्मा और आईएएस मुकुल शर्मा विवाद 23 दिसंबर 2025 को वन मंत्री संजय शर्मा सीकर कलेक्टर मुकुल शर्मा से नाराज हो गए। उन्होंने कहा- कलेक्टर साहब आपकी मर्जी हो उस तरह से इस सीकर जिले को और यहां के सेवा शिविरों को चलाइए, मैं जा रहा हूं। इसके बाद मंत्री नाराज होकर जयपुर के लिए निकल गए। प्रभारी मंत्री संजय शर्मा अचानक सीकर सेवा शिविर में पहुंचे थे। मंत्री और कलेक्टर के बीच हुई बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। मंत्री क्यों हुए नाराज? दरअसल, प्रभारी मंत्री संजय शर्मा सुबह शहरी सेवा शिविर में पहुंचे तो कर्मचारियों की खाली कुर्सियां देखकर भड़क गए। एक्सईन साइड में खड़ी होकर स्ट्रीट लाइट संबंधी सॉफ्ट कॉपी ढूंढने लगीं। प्रभारी मंत्री ने शिविर के कार्यों के बारे में RO महेश योगी को पूछा तो मोबाइल में सूची दिखाने पर गुस्सा हो गए। जब जिला कलेक्टर नगर परिषद अफसरों के पक्ष में उतरे, तो मंत्री ने कहा- इन चोरों को प्रोटेक्शन देने की जरूरत नहीं है…कलेक्टर साहब। विवाद का असर : मंत्री ने शहरी सेवा शिविरों की अव्यवस्थाओं की खोल दी पोल यह मामला अब मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया है। सीएमओ के अधिकारियों ने कलेक्टर से रिपोर्ट ली है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि सीएम पूरे मामले से बेहद नाराज हैं। कलेक्टर हटाने पर भी विचार चल रहा है। दरअसल, सरकार का उद्देश्य है कि शहरी सेवा शिविरों में आमजन के काम हों। मौके पर ही समस्याओं का समाधान हो, लेकिन जिस तरह मंत्री संजय शर्मा ने अधिकारियों और कर्मचारियों से सवाल किए तो वे जवाब देने के बजाय इधर-उधर झांकते रहे। मंत्री संजय शर्मा बोले- विवाद- 2: सांसद रावत कलेक्टर से हुए खफा हाल ही में 8 दिसंबर 2025 को उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और प्रतापगढ़ जिला कलेक्टर अंजलि राजौरिया बीच हुआ विवाद सुर्खियों में है। सांसद का कहना है कि कलेक्टर सरकार के आदेशों की अवहेलना कर रही हैं। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा 54 कार्यों की स्वीकृति जारी होने के बावजूद कलेक्टर ने केवल तीन कार्यों पर अमल किया है। सांसद के अनुसार यह न केवल भारत सरकार, बल्कि राज्य सरकार के आदेशों की भी खुली अवहेलना है। कलेक्टर को इन 54 कार्यों के बाहर जाने का कोई अधिकार नहीं है। विवाद का असर : नाराज सांसद रावत ने मुख्य सचिव को इस बारे में पत्र लिखा। कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र भेजते हुए सांसद के आरोपों को तथ्यों के विपरीत बताया है। विवाद पर सांसद मन्नालाल रावत बोले- अफसरों को सरकार के निर्देशों की पालना करनी होगी। मोदी सरकार द्वारा जारी पीएमकेकेकेवाय (PMKKKY) के तहत यह स्पष्ट निर्देश हैं कि डीएमएफटी का 70 प्रतिशत फंड उस खनन क्षेत्र के 25 किलोमीटर रेडियस में खर्च किया जाना अनिवार्य है, जहां माइंस स्थित है। वहीं, जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने विवाद पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। विवाद-3: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और जोधपुर एसपी विवाद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सीएम को एक पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की। पत्र में लिखा- मेरे संसदीय क्षेत्र जोधपुर में पदस्थापित नारायण टोगस जोधपुर ग्रामीण एसपी, से मेरे कार्यालय द्वारा क्षेत्र की कानून व्यवस्था तथा स्थानीय क्षेत्र में मेरे प्रस्तावित दौरों से संबंधित प्रोटोकाॅल सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए बार-बार संपर्क किया गया। मिलने के लिए निर्धारित बैठक का अग्रिम कार्यक्रम भी सूचित किया गया। पदस्थापन के एक माह बाद भी टोगस द्वारा मेरे कार्यालय से संपर्क नहीं किया गया और न ही किसी प्रकार की सूचना प्रदान की गई। ऐसे में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। जिससे भविष्य में ऐसी लापरवाही फिर न हो। विवाद का असर: केंद्रीय मंत्री शेखावत के 13 सितंबर 2025 को लिखे इस पत्र का खुलासा अब हुआ है। शेखावत के पत्र के बाद सीएम ने 10 दिन बाद ही यानी 23 सितंबर को एक्शन के लिए गृह विभाग को भिजवा दिया था। गृह ग्रुप-1 ने इस संबंध में जांच की और 6 अक्टूबर 2025 को डीजीपी पुलिस जयपुर को तथ्यात्मक टिप्पणी भिजवाने के लिए लिखा। इस मामले की प्रगति 26 दिसंबर 2025 तक अवगत कराने की बात कही गई। गृह विभाग के सूत्र बताते है कि आईपीएस नारायण टोगस के पक्ष से सरकार संतुष्ट है। सरकार ने टोगस को प्रमोशन भी दे दिया है। टोगस नए वर्ष में डीआईजी बन गए हैं। नारायण टोगस बोले- मुझसे जवाब मांगा गया था। मैंने सरकार को अपना जवाब दे दिया है। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता हूं। विवाद-4 : अफसरों से नाराज जयपुर सांसद मंजू शर्मा जयपुर सांसद मंजू शर्मा ने हाल ही में आमेर-हवामहल जोन शिविर का औचक निरीक्षण किया था। सांसद को लोगों ने बताया कि फाइलें नहीं मिल रही हैं। पट्टे जारी नहीं हो रहे। इससे सांसद जोन अधिकारियों से नाराज हो गईं। सांसद ने शिविर में कहा- आप जनता के कामकाज करने के लिए नियुक्त हैं। काम नहीं करोगे तो पद पर रहने का मतलब ही क्या है? सांसद ने हवामहल-आमेर जोन की डिप्टी कमिश्नर से कहा- मैं आपको मेरे घर के कामकाज के लिए नहीं बोल रही हूं। आप इस पद पर जनता के कामकाज करने के लिए ही नियुक्त हैं। बाद में सांसद ने बातचीत में कहा- हम चाहते हैं कि शिविर में लोगों के काम हों। अधिकारी जनता के ही काम नहीं करेंगे तो फिर पद पर रहने का मतलब ही क्या है? मंत्रियों और अफसरों में क्यों होता है टकराव? वजह जानिए मंत्रियों और अफसरों में पहले भी हुआ था विवाद राजस्थान में मंत्रियों और अफसरों के बीच विवाद कोई नहीं बात नहीं है। किसी भी दल की सरकार रही हो, विवाद होते रहे हैं। पिछली गहलोत सरकार के समय कृषि मंत्री रहे लालचंद कटारिया का आईएएस दिनेश कुमार और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का राजेश्वर सिंह से विवाद चर्चा में रहा था। ब्यूरोक्रेसी मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ के मुताबिक विवाद पहले होते रहे हैं। आगे भी होंगे। क्योंकि जनप्रतिनिधि की परीक्षा हर पांच साल में होती है। कोई भी अफसर जनप्रतिनिधियों से हिसाब से काम नहीं कर सकते। मुख्य सचिव निकाल चुके हैं सर्कुलर, नेताओं का सम्मान करें नेताओं के अफसरशाही पर मनमानी के आरोपों से उठे विवाद को खत्म करने के लिए गहलोत सरकार के समय एक सर्कुलर भी निकाला गया था। मुख्य सचिव द्वारा निकाले गए सर्कुलर में अफसरों को विधायकों-जनप्रतिनिधियों का सम्मान करने, उनके मुद‌दों की सुनवाई करने के निर्देश दिए गए थे। मुख्य सचिव के इस सर्कुलर के बावजूद हालात नहीं बदले। अफसरों के खिलाफ नेताओं की शिकायतें बरकरार हैं।

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